गुजरात के अमरेली में आईवीएफ तकनीक से जन्मा पहला गिर बछड़ाBy Admin Sun, 08 February 2026 10:56 AM

अमरेली – गुजरात के अमरेली जिले में गुजरात लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड (जीएलडीबी) की एम्ब्रियो ट्रांसफर प्रयोगशाला में इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक के माध्यम से गिर नस्ल के बछड़े का सफल जन्म हुआ है। यह राज्य में अपनी तरह की पहली उपलब्धि है।

यह सफलता पशु प्रजनन और दुग्ध उत्पादन को बेहतर बनाने में उन्नत प्रजनन तकनीक की संभावनाओं को दर्शाती है। अमरेली जिले के वरूडी स्थित इस प्रयोगशाला में गिर नस्ल के पशुओं के विकास के लिए अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

इस पहल का उद्देश्य किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली प्रजनन तकनीक उपलब्ध कराना और राज्य के पशुओं की आनुवंशिक विशेषताओं को बेहतर बनाना है।

गुजरात के पशुपालन मंत्री जीतू वाघाणी ने बताया कि आईवीएफ कार्यक्रम की शुरुआत पिछले वर्ष राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के तकनीकी सहयोग से की गई थी।

उन्होंने कहा, “प्रारंभिक चरण में 13 प्राप्तकर्ता पशुओं पर भ्रूण प्रत्यारोपण किया गया था। हाल ही में जिस प्राप्तकर्ता गाय ने बछड़े को जन्म दिया है, वह कांकराज नस्ल की है। इसमें जिस भ्रूण का उपयोग किया गया, वह श्रेष्ठ आनुवंशिक गुणों वाली गिर गाय से लिया गया था, जिससे नवजात बछड़े में भी वही उच्च गुणवत्ता वाले गुण मौजूद हैं।”

अधिकारियों के अनुसार, आने वाले महीनों में इस कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा और अमरेली प्रयोगशाला में 30 से अधिक प्राप्तकर्ता पशुओं में भ्रूण प्रत्यारोपण की योजना है। इससे राज्य में गिर नस्ल की गायों के संरक्षण और विस्तार को बढ़ावा मिलेगा।

आईवीएफ और भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक के माध्यम से उच्च आनुवंशिक क्षमता वाली गायों से प्राकृतिक प्रजनन की तुलना में अधिक संख्या में बछड़ों का उत्पादन संभव है। सामान्य तौर पर एक गाय अपने जीवनकाल में सात से आठ बछड़ों को जन्म देती है।

इस तकनीक में श्रेष्ठ दाता गायों से अंडाणु लेकर प्रयोगशाला में निषेचन किया जाता है और तैयार भ्रूण को सरोगेट गायों में प्रत्यारोपित किया जाता है। इस प्रक्रिया से जन्म लेने वाले बछड़े दाता गाय के आनुवंशिक गुणों को प्राप्त करते हैं, जिससे एक ही गाय से जीवनकाल में 100 से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले बछड़े प्राप्त किए जा सकते हैं।

मंत्री वाघाणी ने कहा कि इस तकनीक से गुजरात में बेहतर आनुवंशिक गुणों वाली गायों की संख्या बढ़ेगी और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, जिससे पशुपालकों को सीधे लाभ मिलेगा।

यह उपलब्धि भारत में उन्नत पशु प्रजनन तकनीक के क्षेत्र में गुजरात को अग्रणी स्थान दिलाती है।

 

With inputs from IANS