GLP-1 दवाओं पर सख्ती: बिना डॉक्टर की सलाह के इस्तेमाल रोकने के लिए सरकार के कड़े कदमBy Admin Wed, 01 April 2026 06:23 PM

नई दिल्ली — भारत में टाइप-2 डायबिटीज और मोटापे के इलाज में इस्तेमाल होने वाली GLP-1 दवाओं के अनियंत्रित उपयोग को रोकने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। Drug Controller General of India ने इन दवाओं की अवैध बिक्री और भ्रामक प्रचार पर निगरानी तेज कर दी है।

हाल ही में देशभर में 49 संस्थानों का निरीक्षण किया गया, जिनमें ऑनलाइन फार्मेसी वेयरहाउस, दवा थोक विक्रेता, रिटेलर्स और वेट लॉस क्लीनिक शामिल थे। इन जांचों का मकसद बिना पर्चे के दवा बिक्री, गलत तरीके से प्रिस्क्रिप्शन देने और भ्रामक विज्ञापनों जैसी अनियमितताओं को पकड़ना था।

जिन संस्थानों में नियमों का उल्लंघन पाया गया, उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। सरकार ने साफ किया है कि आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी, जिसमें लाइसेंस रद्द करना, जुर्माना और कानूनी कार्रवाई शामिल है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि GLP-1 दवाएं केवल विशेषज्ञ डॉक्टर—जैसे एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, इंटरनल मेडिसिन स्पेशलिस्ट और कार्डियोलॉजिस्ट—ही prescribe कर सकते हैं। 10 मार्च 2026 को जारी एडवाइजरी में दवा कंपनियों को भ्रामक विज्ञापन और बिना प्रिस्क्रिप्शन उपयोग को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को तुरंत रोकने का निर्देश दिया गया था।

GLP-1 (ग्लूकागॉन-लाइक पेप्टाइड-1) दवाएं ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करती हैं। ये शरीर में इंसुलिन रिलीज को बढ़ाती हैं और भूख कम करके वजन घटाने में भी सहायक होती हैं। हालांकि, इनके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं, जैसे उल्टी, मतली, और गंभीर मामलों में पैंक्रियाटाइटिस, किडनी से जुड़ी समस्याएं या आंतों में रुकावट।

सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे इन दवाओं का इस्तेमाल केवल डॉक्टर की सलाह पर ही करें और इन्हें सिर्फ अधिकृत और सुरक्षित चैनलों से ही खरीदें।

हाल के समय में इन दवाओं की उपलब्धता ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, रिटेल दुकानों और वेलनेस क्लीनिकों पर बढ़ने के बाद सरकार की चिंता भी बढ़ी है। इसी के चलते अब इनके गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए निगरानी और सख्त की जा रही है।
 

 

With inputs from IANS