
नई दिल्ली — डिजिटल तकनीक और एग्रीटेक के बढ़ते इस्तेमाल से आने वाले वर्षों में दक्षिण-पूर्व एशिया की अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा हो सकता है। एक नई रिपोर्ट के मुताबिक, 2033 तक यह सेक्टर हर साल करीब 90 अरब डॉलर का अतिरिक्त GDP पैदा कर सकता है, जिसमें India की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है।
यह संयुक्त रिपोर्ट Omnivore, Beanstalk AgTech और Briter ने तैयार की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने एग्रीटेक और डिजिटल गवर्नेंस में जो प्रगति की है, वह दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक बेहतरीन मॉडल साबित हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, चार ऐसे क्षेत्र हैं जहां सबसे ज्यादा तेजी से विकास हो रहा है—डिजिटल वैल्यू चेन, समावेशी एग्रीफिनटेक, एग्रीफूड लाइफ साइंसेज और टिकाऊ कंज्यूमर ब्रांड्स।
हालांकि, निवेश के मामले में उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला है। 2022 में एग्रीटेक निवेश 750 मिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच गया था, लेकिन 2025 तक इसमें करीब 70% की गिरावट आई। इसका कारण क्षेत्र में बिखरी हुई वैल्यू चेन और स्टार्टअप्स के स्केलिंग की चुनौतियां बताई गई हैं।
दक्षिण-पूर्व एशिया में कृषि करीब 15% GDP में योगदान देती है और यहां 40% तक लोग इसी सेक्टर में काम करते हैं। ऐसे में एग्रीटेक के जरिए बड़े बदलाव की संभावना है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डेवलपमेंट फाइनेंस संस्थाएं और इम्पैक्ट निवेशक अब तक लगभग 650 मिलियन डॉलर एग्रीफूड फंड्स में लगा चुके हैं। आगे बढ़ने के लिए इक्विटी, क्रेडिट और रियायती पूंजी का सही संतुलन जरूरी होगा।
रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ज्यादा सफल मॉडल वही होंगे जो एक ही देश के बाजार पर फोकस करते हुए मजबूत वैल्यू चेन, सही बिजनेस मॉडल और स्थानीय टीम के साथ काम करेंगे।
Southeast Asia के बाजार को अभी पूरी तरह एकीकृत नहीं माना जाता, और दो-तिहाई क्रॉस-बॉर्डर एक्सपेंशन प्रयास अब तक असफल रहे हैं। इसके बावजूद, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादन सुधारने के लिए यहां जबरदस्त संभावनाएं मौजूद हैं।
Mark Kahn ने कहा, “चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन सही रणनीति और स्थानीय समझ के साथ यह सेक्टर बड़ा बदलाव ला सकता है।”
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 2020 के बाद से करीब 75% एग्जिट कॉरपोरेट अधिग्रहण के जरिए हुए हैं, जबकि इसी दौरान सिर्फ 8 कंपनियां IPO तक पहुंच पाई हैं।
With inputs from IANS