कोविड के बाद युवाओं में तेजी से बढ़ीं हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी, डॉक्टरों ने जताई चिंताBy Admin Mon, 25 May 2026 03:23 PM

नई दिल्ली। कोविड महामारी के बाद देश में युवाओं और मध्यम आयु वर्ग के लोगों में हिप से जुड़ी गंभीर बीमारियों के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी के दौरान स्टेरॉयड के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण हिप जॉइंट को नुकसान पहुंचा है, जिसकी वजह से हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के मामलों में बड़ा इजाफा हुआ है।

दिल्ली में आयोजित दूसरे ‘दिल्ली हिप 360 कॉन्फ्रेंस’ में विशेषज्ञों ने बताया कि अब 30 और 40 वर्ष की उम्र के मरीज भी हिप जॉइंट डैमेज, अकड़न, लंगड़ाकर चलने और चलने-फिरने में परेशानी जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।

यह सम्मेलन Delhi Orthopaedic Association और Indian Arthroplasty Association के सहयोग से आयोजित किया गया, जिसमें देशभर के ऑर्थोपेडिक सर्जन और विशेषज्ञों ने भाग लिया। सम्मेलन में टोटल हिप रिप्लेसमेंट, रोबोटिक सर्जरी, रिहैबिलिटेशन और पोस्ट-कोविड हिप समस्याओं के इलाज पर चर्चा हुई।

सम्मेलन के आयोजन अध्यक्ष और Max Hospital के ऑर्थोपेडिक्स एवं जॉइंट रिप्लेसमेंट विभाग के निदेशक डॉ. एल तोमर ने कहा कि युवा मरीजों में हिप रिप्लेसमेंट सर्जरी के मामलों में करीब 40 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

उन्होंने कहा, “कोविड के दौरान स्टेरॉयड ने कई मरीजों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाई, लेकिन कुछ मामलों में इसके लंबे या गलत इस्तेमाल से ऑस्टियोनेक्रोसिस और हिप जॉइंट में समय से पहले खराबी बढ़ी है। अब कम उम्र के मरीज भी गंभीर हिप डैमेज और एडवांस आर्थराइटिस के साथ सामने आ रहे हैं।”

कॉन्फ्रेंस के आयोजन सचिव डॉ. करुण जैन ने बताया कि कई लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य मांसपेशियों के दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

उन्होंने कहा, “एवीएन की सबसे बड़ी समस्या इसकी देर से पहचान होना है। जब तक मरीज डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, तब तक हिप जॉइंट को काफी नुकसान हो चुका होता है। समय पर एमआरआई जांच और सही इलाज से विकलांगता के खतरे को कम किया जा सकता है।”

वहीं, डॉ. गौरव गोविल ने कहा कि आधुनिक तकनीक, बेहतर इम्प्लांट और एडवांस सर्जिकल प्लानिंग के कारण हिप रिप्लेसमेंट अब ऑर्थोपेडिक्स की सबसे सफल प्रक्रियाओं में शामिल हो चुकी है।

उन्होंने कहा, “नई तकनीकों की मदद से मरीज पहले की तुलना में जल्दी सामान्य जीवन में लौट पा रहे हैं। लेकिन सबसे जरूरी बात है समय पर बीमारी की पहचान और वैज्ञानिक तरीके से इलाज, ताकि गंभीर स्थिति से बचा जा सके।”

 

With inputs from IANS