एआई और डिजिटल मांग से रफ्तार पकड़ रहा भारत का डेटा सेंटर बाजार, 2030 तक 6.8 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमानBy Admin Wed, 01 July 2026 03:25 PM

नई दिल्ली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), क्लाउड सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल और तेजी से बढ़ती डिजिटल खपत के दम पर भारत का डेटा सेंटर बाजार अगले कुछ वर्षों में तेज़ी से विस्तार करने वाला है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2030 तक देश का डेटा सेंटर बाजार बढ़कर लगभग 6.8 अरब डॉलर का हो जाएगा।

केपीएमजी इन इंडिया की बुधवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक डेटा सेंटर बाजार में भारत की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2026 के 2-3 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2030 तक करीब 5 प्रतिशत होने का अनुमान है। यह वृद्धि मजबूत मांग, बड़े निवेश और सरकार की अनुकूल नीतियों के कारण संभव होगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2026 में करीब 1.7 अरब डॉलर का डेटा सेंटर बाजार वित्त वर्ष 2030 तक लगभग चार गुना बढ़कर 6.8 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

देश में स्थापित डेटा सेंटर क्षमता भी तेजी से बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2019 की तुलना में यह तीन गुना से अधिक बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में लगभग 1.9 गीगावॉट हो चुकी है। अगले पांच वर्षों में इसमें करीब 4.5 गीगावॉट की अतिरिक्त क्षमता जुड़ने की उम्मीद है।

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रिपोर्ट के अनुसार, अब इस क्षेत्र की वृद्धि पारंपरिक एंटरप्राइज और टेलीकॉम कंपनियों के बजाय हाइपरस्केल क्लाउड प्रदाताओं, वैश्विक कंटेंट प्लेटफॉर्म और एआई आधारित कंपनियों की मांग से संचालित हो रही है।

अनुमान है कि वित्त वर्ष 2030 तक एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग (एचपीसी) से जुड़े वर्कलोड कुल डेटा सेंटर क्षमता का लगभग 55 प्रतिशत हिस्सा होंगे। इसके चलते डेटा सेंटरों में हाई-डेंसिटी, एआई-रेडी इंफ्रास्ट्रक्चर, अत्याधुनिक कूलिंग सिस्टम, अधिक बिजली क्षमता और जीपीयू आधारित आर्किटेक्चर की मांग तेजी से बढ़ रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि कम निर्माण लागत, अपेक्षाकृत सस्ती बिजली और बड़ी आईटी एवं एआई प्रतिभा भारत को वैश्विक डेटा सेंटर उद्योग में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त प्रदान करती है।

भारत में 95 करोड़ से अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता, 66 करोड़ से ज्यादा स्मार्टफोन उपभोक्ता और लगातार बढ़ती डेटा खपत भी इस क्षेत्र की मांग को मजबूत आधार दे रही है।

साथ ही, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम जैसे डेटा लोकलाइजेशन नियमों से देश के भीतर डेटा सेंटरों की मांग में और तेजी आने की संभावना है।

रिपोर्ट के अनुसार, हाइपरस्केल कंपनियों, वैश्विक ऑपरेटरों और भारतीय कंपनियों की ओर से इस क्षेत्र में अब तक 120 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता जताई जा चुकी है, जो इसके दीर्घकालिक विकास की मजबूत संभावनाओं को दर्शाता है।

केपीएमजी इन इंडिया में एमएंडए कंसल्टिंग के पार्टनर रोहन राव ने कहा कि भारत का डेटा सेंटर क्षेत्र ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां बढ़ती मांग, निवेश और नई तकनीक मिलकर बड़े पैमाने पर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास को गति दे रहे हैं। उनके अनुसार, एआई आधारित वर्कलोड डेटा सेंटरों के डिजाइन, क्षमता और आर्थिक मॉडल को पूरी तरह बदल रहे हैं, जिससे भारत वैश्विक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का एक प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
 

 

With inputs from IANS