

नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के लिए बढ़ती कंप्यूटिंग क्षमता की मांग के बीच गूगल ने मेटा को उपलब्ध कराई जा रही अपने Gemini एआई मॉडल की क्षमता पर सीमा लगा दी है। यह फैसला तब लिया गया जब मेटा ने गूगल से उसकी उपलब्ध क्षमता से कहीं अधिक कंप्यूटिंग संसाधनों की मांग की।
फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रतिबंध मार्च के आसपास लागू किया गया। इसके चलते गूगल मेटा की पूरी एआई कंप्यूटिंग जरूरतों को पूरा नहीं कर सका, जिससे कंपनी की कुछ आंतरिक एआई परियोजनाएं प्रभावित हुईं और उनमें देरी हुई।
मेटा, गूगल की एआई सेवाओं के सबसे बड़े ग्राहकों में से एक है। Gemini मॉडल के व्यापक उपयोग के कारण कंपनी की मांग काफी अधिक थी, जिससे कंप्यूटिंग क्षमता की कमी का असर उस पर सबसे ज्यादा पड़ा।
रिपोर्ट के अनुसार, संसाधनों की कमी को देखते हुए मेटा ने अपने कर्मचारियों से एआई संसाधनों का अधिक कुशल तरीके से उपयोग करने को कहा है। इसके तहत जनरेटिव एआई मॉडल के उपयोग को मापने वाले एआई टोकन की खपत कम करने पर भी जोर दिया गया है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गूगल के कुछ अन्य ग्राहकों को भी कंप्यूटिंग संसाधनों की सीमित उपलब्धता का सामना करना पड़ा है, हालांकि उनका असर मेटा की तुलना में कम रहा।
यह घटनाक्रम दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में शामिल बड़ी टेक कंपनियों के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पर्याप्त कंप्यूटिंग क्षमता उपलब्ध कराना बन गई है। डेटा सेंटर और अत्याधुनिक चिप्स पर अरबों डॉलर के निवेश के बावजूद एआई कंप्यूटिंग की मांग उपलब्ध संसाधनों से कहीं अधिक बनी हुई है।
गूगल की मूल कंपनी Alphabet ने भी इस चुनौती को स्वीकार किया है। पहली तिमाही के नतीजों में कंपनी ने बताया कि Google Cloud का राजस्व बढ़कर 20 अरब डॉलर पहुंच गया, लेकिन मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुंदर पिचाई ने कहा कि कंप्यूटिंग क्षमता की कमी के कारण क्लाउड कारोबार की संभावित वृद्धि प्रभावित हुई और लंबित ऑर्डरों (बैकलॉग) में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।
मेटा के लिए Gemini एआई क्षमता पर लगाई गई यह सीमा इस बात का संकेत है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी अब पूरी टेक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ी बाधा बनती जा रही है, जबकि कंपनियां जनरेटिव एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग में तेजी से निवेश बढ़ा रही हैं।
With inputs from IANS