
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने बुधवार को स्पष्ट किया कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से कुछ पुराने वाहनों की माइलेज में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन इससे इंजन खराब होने या वाहनों में बड़े पैमाने पर तकनीकी दिक्कत आने का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
राज्यसभा में एक लिखित जवाब में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने बताया कि E10 ईंधन के लिए डिजाइन किए गए कुछ पुराने वाहनों में ईंधन दक्षता (माइलेज) लगभग 3 से 5 प्रतिशत तक कम हो सकती है। हालांकि, यह कमी सीमित है और इसे लेकर घबराने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने कहा कि किसी भी वाहन की माइलेज सिर्फ ईंधन पर निर्भर नहीं करती। ड्राइविंग का तरीका, वाहन की नियमित सर्विसिंग, टायरों में सही हवा, व्हील अलाइनमेंट और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल जैसे कई अन्य कारक भी ईंधन दक्षता को प्रभावित करते हैं।
मंत्री ने कहा कि जहां कुछ पुराने वाहनों में माइलेज में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है, वहीं E20 पेट्रोल के कई फायदे भी हैं। इसमें उच्च ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, अधिक प्रभावी दहन (कंबशन) और स्मूद एक्सीलरेशन जैसी विशेषताएं शामिल हैं।
इससे पहले इसी महीने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी E20 पेट्रोल को लेकर उठ रहे सवालों पर जवाब दिया था। उन्होंने आलोचकों को चुनौती देते हुए कहा था कि अगर E20 पेट्रोल से किसी वाहन को नुकसान हुआ हो तो उसका एक भी प्रमाण सामने लाकर दिखाएं।
7 जुलाई को नई दिल्ली में आयोजित 'विकसित भारत कॉन्क्लेव' में गडकरी ने कहा था, "देश में E20 पेट्रोल के कारण किसी भी कार में समस्या आने का एक भी मामला नहीं है। अगर ऐसा कोई मामला है तो उसका नाम बताइए।"
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि E20 पेट्रोल के खिलाफ माइलेज कम होने और वाहन खराब होने जैसी बातें "पेड कैंपेन" के तहत फैलाई जा रही हैं और इन दावों का कोई ठोस आधार नहीं है।
With inputs from IANS
