
नई दिल्ली: साइबर ठगी पर लगाम कसने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और बिग डेटा एनालिटिक्स की मदद से 88 लाख से अधिक संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें बंद कर दिया है। इन कनेक्शनों का दोबारा सत्यापन (री-वेरिफिकेशन) कराने में विफल रहने के बाद इन्हें डिस्कनेक्ट किया गया।
राज्यसभा में केंद्रीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने बताया कि DoT द्वारा विकसित ASTR नामक AI आधारित प्रणाली ने इन संदिग्ध मोबाइल कनेक्शनों की पहचान की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों में दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार लगातार तकनीक आधारित कदम उठा रही है।
मंत्री ने बताया कि संचार साथी पोर्टल पर उपलब्ध 'चक्षु' (Chakshu) सुविधा के जरिए नागरिक संदिग्ध कॉल, संदेश और अन्य धोखाधड़ी वाले संचार की शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 15 जुलाई 2026 तक इस प्लेटफॉर्म पर मिली 11.18 लाख से अधिक शिकायतों के आधार पर 50.90 लाख मोबाइल कनेक्शन बंद किए जा चुके हैं। हालांकि DoT किसी एक शिकायत पर कार्रवाई नहीं करता, बल्कि सभी शिकायतों के सामूहिक विश्लेषण के बाद आवश्यक कदम उठाए जाते हैं।
सरकार ने साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP) भी विकसित किया है, जिसके माध्यम से गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) सहित विभिन्न एजेंसियों के साथ सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता है। इसका उद्देश्य साइबर अपराध और वित्तीय धोखाधड़ी में दूरसंचार संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना है।
मंत्री ने बताया कि भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने भी अपने विनियमित संस्थानों को DIP से जुड़ने के निर्देश दिए हैं। अब तक 50 से अधिक SEBI-नियंत्रित संस्थाएं इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुकी हैं।
इसके अलावा, CERT-In द्वारा संचालित नेशनल साइबर कोऑर्डिनेशन सेंटर (NCCC) देश के साइबर स्पेस पर लगातार निगरानी रखता है। किसी भी संभावित साइबर खतरे की जानकारी संबंधित विभागों, राज्य सरकारों और अन्य एजेंसियों के साथ साझा की जाती है, ताकि समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके।
With inputs from IANS