रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा, 405 अहम उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन को मंजूरीBy Admin Tue, 18 August 2026 04:27 PM

Photo: IANS

रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने और घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को 405 रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रक्षा वस्तुओं वाली छठी ‘पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट’ अधिसूचित की। इन वस्तुओं में करीब 3,070 करोड़ रुपये का संभावित कारोबारी अवसर अनुमानित है।

रक्षा उत्पादन विभाग की ओर से जारी सूची में लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स, सब-सिस्टम, सब-असेंबली, स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट्स और कच्चे माल को शामिल किया गया है। इनमें भारतीय तटरक्षक बल के 16 और रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (DPSUs) के 389 आइटम हैं।

सूची में थलसेना और वायुसेना के लिए इस्तेमाल होने वाले कई महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म और प्रणालियां शामिल हैं। वायुसेना से जुड़े उपकरणों में एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, सुखोई-30 एमकेआई, लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट और एएल-31एफपी इंजन से संबंधित वस्तुएं शामिल हैं।

थलसेना के टी-72, टी-90 और बीएमपी-II जैसे बख्तरबंद प्लेटफॉर्म से जुड़े उपकरण भी इस सूची का हिस्सा हैं। इसके अलावा कॉन्कर्स-एम, इनवार और एमआरएसएएम जैसी मिसाइल प्रणालियों से संबंधित वस्तुओं को भी स्वदेशीकरण के लिए चिन्हित किया गया है।

रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में रडार, सोनार, फायर कंट्रोल सिस्टम और सैटेलाइट कम्युनिकेशन सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण उपकरण भी सूची में शामिल हैं। हाई एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक एम्युनिशन और अन्य महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों को भी घरेलू स्तर पर विकसित करने की दिशा में रखा गया है।

सरकार के अनुसार, इन सभी वस्तुओं की विस्तृत सूची SRIJAN पोर्टल पर उपलब्ध है। प्रत्येक वस्तु के लिए स्वदेशीकरण की एक संभावित समयसीमा भी निर्धारित की गई है। स्वदेशी तकनीक और उत्पादन क्षमता सफलतापूर्वक विकसित होने के बाद संबंधित वस्तुओं की खरीद भारतीय उद्योग से की जाएगी।

रक्षा मंत्रालय ने बताया कि रक्षा सार्वजनिक उपक्रम और भारतीय तटरक्षक बल ‘मेक’ प्रक्रिया तथा इन-हाउस विकास सहित विभिन्न माध्यमों से इन वस्तुओं का स्वदेशीकरण करेंगे। इस प्रक्रिया में भारतीय उद्योग, खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा।

छठी पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट को आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की सरकार की कोशिशों की अगली कड़ी माना जा रहा है। इससे घरेलू कंपनियों के लिए नए कारोबारी अवसर पैदा होने, निवेश और नवाचार को बढ़ावा मिलने तथा देश के रक्षा विनिर्माण तंत्र को मजबूत करने की उम्मीद है।

SRIJAN डिफेंस पोर्टल की शुरुआत अगस्त 2020 में की गई थी। इसका उद्देश्य रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और सर्विस हेडक्वार्टर्स द्वारा इस्तेमाल होने वाली उन रक्षा वस्तुओं को भारतीय उद्योग के सामने रखना है, जिन्हें देश में ही विकसित और निर्मित किया जा सकता है। पोर्टल के जरिए MSMEs और स्टार्टअप्स को भी रक्षा क्षेत्र की सप्लाई चेन में प्रवेश का अवसर मिलता है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार, जून 2026 तक SRIJAN पोर्टल के माध्यम से रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और सर्विस हेडक्वार्टर्स ने 33,000 से अधिक रक्षा वस्तुओं को स्वदेशीकरण के लिए उद्योग के सामने रखा है। इनमें पहली पांच पॉजिटिव इंडिजिनाइजेशन लिस्ट के तहत अधिसूचित 5,012 वस्तुएं भी शामिल हैं।

पिछले पांच वर्षों में 15,700 से अधिक रक्षा वस्तुओं का सफलतापूर्वक स्वदेशीकरण किया जा चुका है। इससे करीब 9,000 करोड़ रुपये के अनुमानित आयात प्रतिस्थापन का रास्ता तैयार हुआ है। इसके अलावा, मार्च 2026 तक रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों ने घरेलू विक्रेताओं को इन-हाउस उत्पादन समेत करीब 10,000 करोड़ रुपये के खरीद आदेश भी दिए हैं।

नई सूची के लागू होने से रक्षा क्षेत्र में घरेलू कंपनियों, विशेषकर MSMEs और उभरते स्टार्टअप्स के लिए नए अवसर खुल सकते हैं। इससे न केवल आयात बिल घटाने में मदद मिलेगी, बल्कि देश के भीतर तकनीकी क्षमता और रक्षा उत्पादन का आधार भी और व्यापक होने की उम्मीद है।

 

With inputs from IANS