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भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है। अगस्त 2026 तक देश की स्थापित डेटा सेंटर पावर क्षमता बढ़कर 1.57 GW हो गई है, जो 2020 में लगभग 375 MW थी। सरकार के एक आधिकारिक फैक्टशीट के अनुसार, 2030 तक यह क्षमता करीब 8 GW तक पहुंच सकती है।
इस विस्तार के पीछे डेटा सेंटर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रहे निवेश को प्रमुख कारण माना जा रहा है। फिलहाल करीब 70 अरब डॉलर के निवेश पर काम चल रहा है, जबकि लगभग 90 अरब डॉलर की परियोजनाओं की घोषणा पहले ही की जा चुकी है।
भारत में डेटा सेंटर का विकास ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं के तेजी से विस्तार के साथ हुआ है। सरकारी सेवाओं के ऑनलाइन होने और नागरिकों की डिजिटल सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता ने सुरक्षित, भरोसेमंद और चौबीसों घंटे उपलब्ध डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बढ़ा दी है।
राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने देश में कई अत्याधुनिक राष्ट्रीय डेटा सेंटर स्थापित किए हैं। इनमें नई दिल्ली स्थित NIC मुख्यालय के अलावा पुणे, हैदराबाद और भुवनेश्वर के डेटा सेंटर शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, NIC ने विभिन्न राज्यों की राजधानियों में 37 छोटे डेटा सेंटर भी स्थापित किए हैं।
ये केंद्र केंद्र और राज्य सरकारों सहित विभिन्न स्तरों के सरकारी संस्थानों को भरोसेमंद डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद करते हैं। इनके जरिए 24 घंटे संचालन, सिस्टम प्रबंधन और मौके पर तकनीकी विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाती है।
हालांकि, डेटा सेंटर क्षमता बढ़ने के साथ ऊर्जा और संसाधन दक्षता की चुनौती भी महत्वपूर्ण होती जा रही है। सरकारी बयान में कहा गया कि डेटा सेंटरों को लगातार संचालन के लिए भरोसेमंद बिजली आपूर्ति के साथ-साथ प्रभावी कूलिंग सिस्टम की आवश्यकता होती है।
विद्युत मंत्रालय के तहत केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुसार, डेटा सेंटर क्षेत्र की बिजली मांग 2031-32 तक 17 GW तक पहुंच सकती है। ऐसे में क्षेत्र के विस्तार के साथ ऊर्जा की बढ़ती जरूरत को पूरा करना एक बड़ी चुनौती होगी।
सरकार डेटा सेंटर क्षेत्र के सतत विकास के लिए स्वच्छ ऊर्जा और संसाधनों के अधिक कुशल इस्तेमाल को भी बढ़ावा दे रही है। खास तौर पर बिजली की उपलब्धता, ऊर्जा दक्षता और कूलिंग से जुड़ी तकनीकों में सुधार आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की लागत और पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था अब विकास के एक ऐसे चरण में प्रवेश कर रही है, जहां क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस और ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार के साथ कंप्यूटिंग क्षमता, डेटा स्टोरेज और तेज कनेक्टिविटी की मांग लगातार बढ़ रही है।
डेटा सेंटर इसी डिजिटल इकोसिस्टम की रीढ़ हैं। आने वाले वर्षों में भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की गति बनाए रखने के लिए ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार जरूरी होगा, जो सुरक्षित होने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर और लगातार संचालन में सक्षम हो।