Meta अब I4C के साइबरक्राइम पोर्टल पर सीधे रिपोर्ट करेगा बाल सुरक्षा से जुड़े मामलेBy IANS Tue, 15 September 2026 06:18 PM

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भारत में बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी मेटा ने बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। कंपनी अब अपने प्लेटफॉर्म पर सामने आने वाले बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की सीधे भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) द्वारा संचालित साइबरक्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करेगी।

मेटा का यह फैसला भारत में कंपनी पर बढ़ती जांच के बीच आया है। हाल ही में इंस्टाग्राम पर विज्ञापनों के जरिए कथित तौर पर बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) के प्रसार और प्रचार को लेकर कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में काम करने वाले प्रत्येक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक मूलभूत जिम्मेदारी है और इससे किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता। सरकार मेटा की नई पहल को सोशल मीडिया पर बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में शुरुआती कदम के तौर पर देख रही है।

मेटा ने मौजूदा मामले पर जारी बयान में कहा कि उसके प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा कंपनी की प्राथमिकता है और वह सरकार के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि ऐसे अपराधों में शामिल लोगों को जवाबदेह ठहराया जा सके।

मेटा के प्रवक्ता ने कहा, “इस तरह के नुकसान से निपटने के लिए अपने सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने के उद्देश्य से मेटा अब बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों की सीधे I4C द्वारा संचालित साइबरक्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करेगा।”

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बाल यौन शोषण सामग्री और बच्चों के शोषण से जुड़े अन्य आपत्तिजनक कंटेंट को प्रसारित करने या उस तक पहुंच उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है। ऐसे मामलों को सीधे कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचाने से यह सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है कि गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों का निपटारा केवल प्लेटफॉर्म की आंतरिक कंटेंट मॉडरेशन व्यवस्था तक सीमित न रहे।

सरकार ने हालांकि संकेत दिया है कि ऑनलाइन बाल सुरक्षा के लिए अभी और कदम उठाने की जरूरत है। सूत्रों के मुताबिक, अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ भी बातचीत जारी है, ताकि हानिकारक सामग्री की पहचान और उसे हटाने की प्रक्रिया को अधिक सक्रिय और प्रभावी बनाया जा सके।

सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए पर्याप्त सक्रिय उपाय नहीं करने वाले प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब दुनियाभर में सोशल मीडिया कंपनियों की बच्चों की सुरक्षा को लेकर जवाबदेही बढ़ रही है। बच्चों के यौन शोषण, हानिकारक सामग्री और ऑनलाइन उत्पीड़न के जोखिम को लेकर नियामकों और सरकारों की निगरानी लगातार कड़ी हो रही है।

भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत संचालित होते हैं। इन नियमों में इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म के लिए विभिन्न सावधानियों और उचित परिश्रम संबंधी जिम्मेदारियां निर्धारित की गई हैं।

मेटा की भूमिका को लेकर चिंता तब और बढ़ी जब टेक ट्रांसपेरेंसी प्रोजेक्ट (TTP) की एक जांच में दावा किया गया कि इस साल फेसबुक और इंस्टाग्राम पर बाल यौन शोषण सामग्री वाले सशुल्क विज्ञापन दिखाई दिए थे। रिपोर्ट में वास्तविक बच्चों की तस्वीरों को एआई की मदद से बदले गए कंटेंट का भी उल्लेख किया गया था।

जांच में मेटा के प्लेटफॉर्म पर एआई से तैयार की गई बाल यौन शोषण सामग्री वाले 300 से अधिक विज्ञापनों का भी दावा किया गया था। इन निष्कर्षों के बाद प्लेटफॉर्म की कंटेंट मॉडरेशन और विज्ञापन निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे थे।

मेटा की ओर से I4C के साइबरक्राइम पोर्टल पर सीधे रिपोर्टिंग का फैसला ऐसे मामलों में प्लेटफॉर्म और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच समन्वय बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।