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खेलों में अब केवल शारीरिक क्षमता, मानसिक मजबूती और कड़ी मेहनत ही सफलता की गारंटी नहीं रह गई है। खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में खेल विज्ञान, आधुनिक तकनीक, पोषण और शरीर की कार्यप्रणाली से जुड़ा वैज्ञानिक विश्लेषण भी अहम भूमिका निभा रहा है। इसी सोच के साथ भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास ने 15 से 19 वर्ष की आयु के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए एक विशेष खेल छात्रवृत्ति कार्यक्रम शुरू किया है।
आईआईटी मद्रास की एक पहल एक्रोफेज (Acrophase) के तहत एसबीआई फाउंडेशन एसीई पोटेंशियल एथलीट स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप शुरू की गई है। इसके जरिए 90 प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ियों को आर्थिक और वैज्ञानिक सहायता प्रदान की जाएगी। इनमें 45 लड़के और 45 लड़कियां शामिल होंगी। यह छात्रवृत्ति एथलेटिक्स, तैराकी, मुक्केबाजी, कुश्ती, निशानेबाजी, तीरंदाजी और बैडमिंटन के खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध है।
चयनित खिलाड़ियों को प्रतिमाह 40 हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी। इसके अतिरिक्त उन्हें खेल विज्ञान पर आधारित प्रदर्शन मूल्यांकन और व्यक्तिगत जरूरतों के अनुरूप पोषण संबंधी मार्गदर्शन भी मिलेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य खिलाड़ियों को उनकी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करने और उच्च स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार होने में मदद करना है।
आईआईटी मद्रास के अनुसार, किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी की सफलता के पीछे वर्षों का अभ्यास, अनुशासन और आगे बढ़ने का जुनून होता है। हालांकि, केवल प्रतिभा पर्याप्त नहीं है। सही समय पर मिलने वाली आर्थिक सहायता और वैज्ञानिक मार्गदर्शन किसी खिलाड़ी के करियर की दिशा बदल सकते हैं।
संस्थान ने लिंक्डइन पर साझा की गई जानकारी में बताया कि एक्रोफेज उसका ऐसा अनुसंधान केंद्र है, जिसका उद्देश्य मानव प्रदर्शन की सीमाओं को समझना और उन्हें बेहतर बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना है। इस पहल में वियरेबल टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों, आईआईटी मद्रास के शोधकर्ताओं तथा मानव शरीर विज्ञान और बायोमैकेनिक्स के विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया है।
एक्रोफेज का विशेष जोर आंकड़ों और तकनीक के माध्यम से खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता का आकलन करने पर है। इसमें फिजियोलॉजी, बायोमैकेनिक्स और व्यवहार संबंधी मनोविज्ञान से मिली विशेषज्ञ जानकारी का इस्तेमाल कर प्रदर्शन सुधारने के कार्यक्रम तैयार किए जाते हैं।
आईआईटी मद्रास के अनुसंधान एवं नवाचार तंत्र से विकसित यह पहल सामाजिक प्रभाव को ध्यान में रखकर शुरू की गई है। संस्थान की इंजीनियरिंग, बायोमेडिकल साइंस और डेटा एनालिटिक्स में विशेषज्ञता के आधार पर शोध को ऐसे व्यावहारिक समाधानों में बदला जा रहा है, जिनका इस्तेमाल खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और प्रदर्शन सुधारने में किया जा सके।
संस्थान के मुताबिक, एसबीआई फाउंडेशन और वाधवानी फाउंडेशन के सहयोग से एक्रोफेज देशभर के सामान्य और पैरा-एथलीटों को समावेशी तथा शोध आधारित प्रशिक्षण एवं क्षमता विकास कार्यक्रमों के जरिए सहायता प्रदान कर रहा है।
इस छात्रवृत्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया 7 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और इच्छुक खिलाड़ी 16 नवंबर तक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों का भारतीय नागरिक होना और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना अनिवार्य है।
खेलों के आधार पर कुल 90 छात्रवृत्तियों का वितरण किया जाएगा। एथलेटिक्स के खिलाड़ियों के लिए सबसे अधिक 18 छात्रवृत्तियां निर्धारित की गई हैं। तैराकी और निशानेबाजी के लिए 16-16, तीरंदाजी के लिए 12, कुश्ती और मुक्केबाजी के लिए 10-10 तथा बैडमिंटन के लिए आठ छात्रवृत्तियां उपलब्ध होंगी।
चयन मुख्य रूप से खिलाड़ियों की खेल उपलब्धियों और प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। हालांकि, समान योग्यता वाले उम्मीदवारों में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस पहल से उन युवा खिलाड़ियों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जिनमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ने की क्षमता तो है, लेकिन आर्थिक संसाधनों और वैज्ञानिक प्रशिक्षण सुविधाओं की कमी उनके विकास में बाधा बनती है।