अमेरिका-नेतृत्व वाले शांति प्रयासों के बीच ईयू ने रूस पर प्रतिबंध छह महीने और बढ़ाएBy Admin Tue, 23 December 2025 06:29 AM

ब्रसेल्स। यूरोपीय संघ (ईयू) की परिषद ने रूस के खिलाफ लगाए गए व्यापक आर्थिक प्रतिबंधों को अगले छह महीनों के लिए और बढ़ा दिया है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब यूरोप अमेरिका के नेतृत्व में चल रही यूक्रेन-रूस शांति वार्ताओं के बीच मॉस्को से सीधे संवाद की संभावनाएं भी तलाश रहा है।

रूस के खिलाफ ये प्रतिबंध पहली बार वर्ष 2014 में लगाए गए थे, जिन्हें फरवरी 2022 के बाद और अधिक सख्त तथा व्यापक बनाया गया। ईयू परिषद के अनुसार, इन प्रतिबंधों के तहत व्यापार, वित्त, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं, उद्योग, परिवहन और लक्जरी सामान सहित कई क्षेत्रों को शामिल किया गया है।

आर्थिक प्रतिबंधों को अब 31 जुलाई 2026 तक बढ़ा दिया गया है। इसके अलावा, ईयू ने हाल ही में रूस के खिलाफ अतिरिक्त दंडात्मक कदम भी उठाए हैं। पिछले सप्ताह ही ईयू ने उन व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए, जिन पर रूस के तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े तेल टैंकरों का समर्थन करने का आरोप है। साथ ही, रूस की कथित हाइब्रिड गतिविधियों को लेकर अलग से प्रतिबंध लगाए गए और शैडो फ्लीट से जुड़े बताए जा रहे 41 रूसी जहाजों पर भी पाबंदी लगा दी गई।

इसी बीच, यूरोपीय संघ ने यूक्रेन के प्रति अपने समर्थन को दोहराया है। पिछले सप्ताह आयोजित शिखर सम्मेलन में यूरोपीय परिषद ने यूक्रेन की सैन्य और आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अगले दो वर्षों में 90 अरब यूरो (लगभग 105.4 अरब डॉलर) के ऋण पैकेज को मंजूरी दी।

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा कि ईयू को यह सुनिश्चित करना होगा कि “यूक्रेन शांति समझौते पर बातचीत करने की सबसे बेहतर स्थिति में हो।”

इन कदमों से एक ओर जहां यूरोप के दबाव की नीति झलकती है, वहीं दूसरी ओर यह चिंता भी सामने आती है कि कहीं वह यूक्रेन संकट के समाधान से जुड़ी वार्ताओं में हाशिये पर न चला जाए।

पिछले महीने मीडिया में लीक हुए अमेरिका द्वारा तैयार किए गए रूस-यूक्रेन शांति प्रस्ताव ने यूरोप और यूक्रेन में चिंता बढ़ा दी थी। आलोचकों का कहना था कि यह मसौदा रूस के पक्ष में झुका हुआ है और इससे यह आशंका पैदा हुई कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन यूक्रेन पर बड़े समझौते करने का दबाव बना सकता है।

इसके बाद से यूरोपीय और यूक्रेनी वार्ताकारों ने ट्रंप के दूतों के साथ बातचीत की है, ताकि मसौदे में अपने सुझाव शामिल कराए जा सकें। हालांकि, मौजूदा संस्करण की शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं की गई हैं।

रविवार को यूक्रेन संकट पर तीन दिनों तक चली वार्ता समाप्त हुई, जिसमें फ्लोरिडा और मियामी में अमेरिका, रूस, यूक्रेन और यूरोपीय प्रतिनिधियों के बीच अलग-अलग बैठकें हुईं। अमेरिका के राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने इन बैठकों को “उत्पादक और सकारात्मक” बताया।

हालांकि, रूस ने इस पर अधिक आलोचनात्मक प्रतिक्रिया दी। रूस के उप विदेश मंत्री सर्गेई रयाबकोव ने कहा कि यूक्रेन और उसके यूरोपीय साझेदार प्रगति में बाधा डाल रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह एक तथ्य है कि जब भी अमेरिका के साथ हमारी बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है, कीव और उसके यूरोपीय संरक्षक असाधारण कदम उठाकर उसे बाधित करने की कोशिश करते हैं।”

इसके बावजूद, यूरोप — या कम से कम कुछ यूरोपीय देश — अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय रूस के साथ सीधा संवाद स्थापित करने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।

ब्रसेल्स में ईयू शिखर सम्मेलन के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यदि मौजूदा प्रयास यूक्रेन में स्थायी शांति सुनिश्चित करने में विफल रहते हैं, तो यूरोपीय संघ को रूस के साथ संवाद के लिए तैयार रहना चाहिए। मैक्रों ने यह भी कहा कि वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से दोबारा बात करने के लिए तैयार हैं। दोनों नेताओं के बीच जुलाई में फोन पर बातचीत हुई थी।

क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि राष्ट्रपति पुतिन मैक्रों के साथ संवाद के लिए तैयार हैं। इस प्रतिक्रिया का स्वागत करते हुए फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय ने कहा, “आने वाले दिनों में हम आगे बढ़ने के सर्वोत्तम तरीके पर निर्णय लेंगे।” साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि रूस के साथ होने वाली किसी भी बातचीत में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की और यूरोपीय सहयोगियों को पूरी पारदर्शिता के साथ शामिल रखा जाएगा।

 

With inputs from IANS