बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका और वेनेजुएला आमने-सामनेBy Admin Wed, 24 December 2025 06:02 AM

संयुक्त राष्ट्र - तनाव बढ़ने के बीच अमेरिका और वेनेजुएला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपात बैठक में आमने-सामने आ गए। यह टकराव ऐसे समय हुआ है, जब वाशिंगटन ने वेनेजुएला से तेल ले जा रहे दो जहाजों को अपने कब्जे में लिया है और सप्ताहांत में वहां जा रहे एक अन्य टैंकर को रोकने की कोशिश की गई।

मंगलवार को अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि माइक वाल्ज़ ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका मादुरो को ड्रग कार्टेल और आपराधिक गिरोहों को वित्तपोषित करने से रोकने के लिए अधिकतम स्तर तक प्रतिबंध लगाएगा और उन्हें सख्ती से लागू करेगा।”

उन्होंने कहा, “हकीकत यह है कि प्रतिबंधित तेल टैंकर मादुरो और उनके अवैध शासन के लिए आर्थिक जीवनरेखा बने हुए हैं,” और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा वेनेजुएला पर लगाए गए नाकेबंदी को उचित ठहराया।

वहीं, वेनेजुएला के स्थायी प्रतिनिधि सैमुअल मोंकाडा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनका देश न तो ड्रग तस्करी में शामिल है और न ही अमेरिका में आपराधिक गिरोह भेजने में।

उन्होंने कहा कि “एक लाल रेखा पार कर ली गई है” और अमेरिका “अंतरराष्ट्रीय कानून का बड़े पैमाने पर उल्लंघन” और “समुद्री डकैती” में लिप्त है।
मोंकाडा ने कहा, “हम अपने देश की शांति की रक्षा करते हुए संयम नहीं खोएंगे।”

रिपोर्ट के अनुसार, जिन जहाजों को अमेरिका ने जब्त किया, उनमें से एक वेनेजुएला का तेल चीन ले जा रहा था। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए चीन के उप स्थायी प्रतिनिधि सुन लेई ने कहा, “अमेरिकी कार्रवाइयां अन्य देशों की संप्रभुता, सुरक्षा और वैध अधिकारों का गंभीर उल्लंघन करती हैं तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हैं।”

चीन और रूस ने सुरक्षा परिषद में वेनेजुएला के समर्थन में खुलकर रुख अपनाया।
रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंजिया ने अमेरिका की आलोचना दोहराते हुए कहा कि उसका “काउबॉय जैसी हरकतें” अंतरराष्ट्रीय कानून के सभी प्रमुख मानदंडों के खिलाफ हैं।

कई अन्य देशों ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर व्यापक मानवाधिकार उल्लंघन, कथित चुनावी धांधली और राजनीतिक विरोधियों के दमन को लेकर चिंता जताई, लेकिन साथ ही अमेरिका की कार्रवाइयों पर भी सीमित आलोचना की।

ब्रिटेन के उप स्थायी प्रतिनिधि आर्ची यंग ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा, “समुद्र से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानून का आधार संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि है। यूनाइटेड किंगडम हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून और उसके पालन का समर्थन करेगा।”

फ्रांस के उप स्थायी प्रतिनिधि जय धर्माधिकारी ने कहा कि उनका देश अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रति प्रतिबद्ध है और उनका मानना है कि “राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए।”
अमेरिका द्वारा ड्रग तस्करी के संदेह में नौकाओं को निशाना बनाए जाने पर उन्होंने कहा, “ड्रग तस्करी को रोकना अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप होना चाहिए।”

अमेरिका ने सितंबर में ‘ऑपरेशन सदर्न स्पीयर’ शुरू करने के बाद से अब तक 29 संदिग्ध ड्रग नौकाओं को डुबो दिया है। संयुक्त राष्ट्र के सहायक महासचिव खालिद खियारी के अनुसार, इन हमलों में 105 लोगों की मौत हुई है।

खियारी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टुर्क के हवाले से कहा कि “कैरिबियन और प्रशांत महासागर में अमेरिका द्वारा की गई हवाई हमले, जो कथित रूप से ड्रग तस्करी से जुड़े थे, अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून का उल्लंघन हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि वेनेजुएला में “सार्वजनिक जीवन और अधिक सैन्यीकृत हो गया है, जबकि लोग गंभीर मानवाधिकार चिंताओं और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।”

नाकेबंदी के प्रभाव पर बोलते हुए खियारी ने कहा कि ऊंची महंगाई और मुद्रा अस्थिरता से जूझ रहे देश में “लाखों लोग बुनियादी जरूरतें पूरी करने में असमर्थ हैं” और हालिया हवाई व समुद्री प्रतिबंध तथा निर्यात में कमी सरकार की बुनियादी सेवाएं देने की क्षमता को और सीमित कर सकती है।

उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस मध्यस्थता के प्रस्तावों और शांतिपूर्ण समाधान की पहल का स्वागत करते हैं।

वाल्ज़ ने, ट्रंप की तरह, अमेरिकी नाकेबंदी और नौकाओं को डुबोने की कार्रवाई को ड्रग्स के खिलाफ युद्ध का हिस्सा बताया और ट्रंप के उस दावे का उल्लेख नहीं किया, जिसमें वेनेजुएला द्वारा अमेरिकी संपत्तियों के अधिग्रहण की बात कही गई थी।

वाल्ज़ ने कहा, “ये ड्रग कार्टेल माफिया जैसे नहीं हैं। ये अत्याधुनिक, तकनीकी रूप से सक्षम, अच्छी तरह से वित्तपोषित हैं और हमारे क्षेत्र में भारी तबाही मचा रहे हैं।”

उन्होंने ‘कार्टेल दे लॉस सोल्स’ और ‘ट्रेन दे अरागुआ’ का नाम लिया, जिन्हें अमेरिका ने विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
उनका कहना था कि ये कार्टेल यूरोप के लिए भी खतरा हैं, क्योंकि ड्रग्स वहीं भेजे जाने थे।

सुरक्षा परिषद में मौजूद अधिकांश यूरोपीय देशों ने ड्रग खतरे को स्वीकार किया, हालांकि उन्होंने अमेरिकी नौकाएं डुबोने की कार्रवाई का खुलकर समर्थन नहीं किया।

 

With inputs from IANS