ट्रंप बोले— रूस और यूक्रेन दोनों चाहते हैं युद्ध का अंत, बातचीत अंतिम चरण के करीबBy Admin Mon, 29 December 2025 05:02 AM

वॉशिंगटन — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस और यूक्रेन दोनों देशों की इच्छा है कि उनके बीच चल रहा युद्ध समाप्त हो। उन्होंने यह टिप्पणी उस समय की, जब फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ उनकी मुलाकात के बाद शांति समझौते से जुड़ी वार्ताएं अंतिम चरण के करीब पहुंच गई हैं।

वार्ता के बाद पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “रूस इसे खत्म करना चाहता है, हर कोई इसे खत्म करना चाहता है। और हम भी चाहते हैं कि यह खत्म हो। मैं चाहता हूं कि यह युद्ध खत्म हो, क्योंकि मैं नहीं चाहता कि इतने लोग मरते रहें।”

ट्रंप ने बताया कि जेलेंस्की के साथ हुई चर्चा में लगभग सभी प्रमुख मुद्दों पर बात हुई। उन्होंने कहा कि यह कूटनीतिक प्रयासों का हिस्सा है, जिसमें हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूरोपीय नेताओं के साथ हुई बातचीत भी शामिल है।

उन्होंने कहा, “हमने लगभग हर विषय पर चर्चा की है। आज हमने काफी विस्तार से बात की।”

ट्रंप ने यह भी बताया कि उसी दिन पुतिन के साथ उनकी दो घंटे से अधिक समय तक फोन पर बातचीत हुई थी और रूसी राष्ट्रपति संघर्ष को सुलझाने के लिए तैयार नजर आए। ट्रंप ने कहा, “वह इसे होता हुआ देखना चाहते हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि उन्हें लगता है कि पुतिन युद्ध समाप्त करने को लेकर गंभीर हैं।

वहीं, जेलेंस्की ने कहा कि मार-ए-लागो में हुई वार्ता कई महीनों से चल रही बातचीत की कड़ी है, जो जिनेवा, मियामी और बर्लिन सहित विभिन्न स्थानों पर हुई है। उन्होंने कहा, “हमारी टीमें एक दिन या एक हफ्ते नहीं, बल्कि एक महीने से भी ज्यादा समय से काम कर रही हैं।”

जेलेंस्की के अनुसार, सुरक्षा गारंटी इस चर्चा का सबसे अहम मुद्दा रही। उन्होंने कहा, “हम इस बात पर सहमत हुए हैं कि स्थायी शांति हासिल करने के लिए सुरक्षा गारंटी एक अहम पड़ाव है।”

ट्रंप ने कहा कि इन सुरक्षा गारंटियों में यूरोप की बड़ी भूमिका होगी और अमेरिका उसका समर्थन करेगा। उन्होंने कहा, “हम यूरोप के साथ काम करना चाहते हैं। वे वहीं मौजूद हैं।”

अभी तक अनसुलझे मुद्दों पर सवाल किए जाने पर ट्रंप ने क्षेत्रीय विवादों की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा, “कुछ जमीन पर कब्जा कर लिया गया है। कुछ जमीन शायद बातचीत का विषय बन सकती है।”

जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र को लेकर यूक्रेन का रुख नहीं बदला है। उन्होंने कहा, “हम उस क्षेत्र का सम्मान करते हैं, जिस पर हमारा नियंत्रण है।” उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी बड़े फैसले के लिए लोकतांत्रिक प्रक्रिया जरूरी होगी। “अगर कोई योजना हमारे समाज के लिए बहुत कठिन होगी, तो निश्चित रूप से हमारे समाज को ही फैसला करना होगा।”

ट्रंप ने कहा कि किसी भी समझौते को संसद या जनमत संग्रह के जरिए मंजूरी मिलनी होगी। उन्होंने कहा, “संभव है कि उन्हें अपनी योजना को संसद या जनता के जनमत संग्रह से मंजूर कराना पड़े।”

दोनों नेताओं ने यूक्रेन की परमाणु ऊर्जा अवसंरचना की स्थिति पर भी चर्चा की। ट्रंप ने कहा कि क्षेत्र का सबसे बड़ा परमाणु संयंत्र जल्दी दोबारा चालू किया जा सकता है और रूस ने उसे निशाना नहीं बनाया है। उन्होंने पुतिन के बारे में कहा, “उन्होंने उस पर मिसाइलें नहीं दागीं। यह एक बड़ा कदम है।”

ट्रंप ने यह भी कहा कि यूक्रेन के पुनर्निर्माण में रूस की भी भूमिका होगी। उन्होंने कहा, “रूस मदद करेगा। रूस चाहता है कि यूक्रेन सफल हो।”

संभावित संघर्षविराम पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि अभी इस पर सहमति नहीं बनी है। उन्होंने कहा, “अभी कोई संघर्षविराम नहीं हुआ है। यह उन मुद्दों में से एक है, जिन पर हम अभी काम कर रहे हैं।”

जेलेंस्की ने कहा कि किसी भी जनमत संग्रह की प्रक्रिया में कई व्यावहारिक चुनौतियां होंगी, खासकर शरणार्थियों की भागीदारी को लेकर। उन्होंने कहा, “यह आसान नहीं है,” और बताया कि इसके लिए पूरे यूरोप में मतदान ढांचे का निर्माण करना होगा।

ट्रंप ने कहा कि वह आशावादी जरूर हैं, लेकिन यथार्थवादी भी। संभावित समझौते की समयसीमा पर उन्होंने कहा, “अगर सब कुछ बहुत अच्छा रहा, तो शायद कुछ हफ्तों में। अगर बहुत खराब रहा, तो यह नहीं होगा।”

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वार्ता विफल रही तो रक्तपात जारी रहेगा। ट्रंप ने कहा, “वे लड़ते रहेंगे और मरते रहेंगे। यह अच्छा नहीं है।”

कार्यक्रम के अंत में ट्रंप ने पत्रकारों का धन्यवाद किया और मार-ए-लागो में लंच को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में मजाक किया। इस दौरान जेलेंस्की मुस्कुराते नजर आए।

यह संघर्ष अब तक हजारों लोगों की जान ले चुका है और वैश्विक भू-राजनीति को गहराई से प्रभावित कर चुका है, जिसमें नाटो, रूस और कई प्रमुख क्षेत्रीय शक्तियां शामिल हैं। पूरे संघर्ष के दौरान अमेरिका ने कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर अहम भूमिका निभाई है।

शांति के लिए किए गए प्रयास पहले भी कई बार विफल रहे हैं, ऐसे में मौजूदा बातचीत यह तय करने की एक अहम कसौटी मानी जा रही है कि क्या लगातार कूटनीतिक प्रयास आखिरकार यूरोप के दशकों में सबसे विनाशकारी युद्ध को रोक पाएंगे या नहीं।

 

With inputs from IANS