
ढाका - बांग्लादेश के एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने देशभर में मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर स्थिति को उजागर करते हुए कहा है कि भीड़ हिंसा, न्यायेतर हत्याएं, हिरासत में मौतें, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, राजनीतिक हिंसा और प्रेस स्वतंत्रता के दमन जैसी घटनाएं चिंताजनक स्तर तक पहुंच गई हैं। स्थानीय मीडिया ने बुधवार को यह जानकारी दी।
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन ऐन ओ सालिश केंद्र (एएसके) की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2025 के दौरान देशभर में “भीड़ आतंक” की घटनाओं में खतरनाक रूप से बढ़ोतरी हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच भीड़ हिंसा में 197 लोगों की जान गई, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 128 था। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2024 में मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद से अब तक कम से कम 293 लोगों की मौत भीड़ हिंसा में हो चुकी है।
बांग्लादेशी बंगाली दैनिक प्रथम आलो के हवाले से एएसके ने कहा, “बिना किसी सबूत, जांच या कानूनी प्रक्रिया के संदेह और अफवाहें फैलाकर लोगों को पीटा गया और उनकी हत्या की गई। ‘तौहीद जनता’ के नाम पर अवैध रूप से भीड़ गठित कर कला और सांस्कृतिक केंद्रों में तोड़फोड़ की गई, बाउल समुदाय पर हमले किए गए और यहां तक कि कब्रों से शव निकालकर जलाने जैसी घटनाएं भी सामने आईं। विरोधी विचार रखने वालों, जिनमें स्वतंत्रता सेनानी भी शामिल हैं, को परेशान किए जाने की घटनाएं हुई हैं।”
रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में कानून प्रवर्तन एजेंसियां निष्क्रिय रहीं और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के प्रयास लगभग न के बराबर रहे।
एएसके की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में देश की विभिन्न जेलों में कम से कम 107 लोगों की मौत हुई, जिनमें 69 विचाराधीन कैदी और 38 सजायाफ्ता कैदी शामिल हैं। देश की जेलों में सबसे अधिक मौतें ढाका सेंट्रल जेल में दर्ज की गईं, जहां 38 कैदियों की जान गई। इसके बाद गाजीपुर जेल में सात मौतें हुईं, जबकि शेष मौतें अन्य जेलों में दर्ज की गईं।
इसके अलावा, एएसके की सूचना संरक्षण इकाई की निगरानी के अनुसार, वर्ष 2025 में कम से कम 38 लोग न्यायेतर हत्याओं में मारे गए। मानवाधिकार संगठन ने कहा कि ये मौतें कानून प्रवर्तन एजेंसियों की हिरासत में, कथित यातना के दौरान या कथित ‘मुठभेड़’ और ‘गोलीबारी’ के नाम पर हुईं, जो देश में जारी मानवाधिकार संकट को दर्शाता है।
रिपोर्ट में यह भी खुलासा किया गया कि जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच बांग्लादेश में राजनीतिक हिंसा की कम से कम 401 घटनाएं हुईं, जिनमें 102 लोगों की मौत हुई और 4,744 लोग घायल हुए।
प्रेस स्वतंत्रता की स्थिति पर चिंता जताते हुए एएसके ने बताया कि इसी अवधि में कम से कम 381 पत्रकारों को उत्पीड़न और यातना का सामना करना पड़ा। इनमें से 23 पत्रकारों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने निशाना बनाया, जबकि 20 पत्रकारों को जान से मारने की धमकियां मिलीं।
अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों को रेखांकित करते हुए एएसके ने जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच कई हिंसक घटनाओं का दस्तावेजीकरण किया है। इनमें हमले, डराने-धमकाने की घटनाएं, लूटपाट, आगजनी और मूर्तियों की तोड़फोड़ शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, केवल वर्ष 2025 में हिंदुओं को निशाना बनाकर कम से कम 42 हमले हुए। इन घटनाओं में 33 घरों को नुकसान पहुंचाया गया, 36 घरों में आग लगाई गई, चार मंदिरों पर हमले किए गए, 64 मूर्तियों को क्षतिग्रस्त किया गया और जमीन हड़पने की नौ घटनाएं सामने आईं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के तहत बांग्लादेश में मानवाधिकार उल्लंघन और अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदू समुदाय पर हमले लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
With inputs from IANS