
संयुक्त राष्ट्र: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में आमने-सामने की बहस के दौरान अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी कि प्रदर्शनकारियों पर हो रहे हमलों को रोकने के लिए “सभी विकल्प खुले हैं”, जबकि ईरान ने कहा कि वह “न तो तनाव बढ़ाना चाहता है और न ही टकराव।”
अमेरिका के स्थायी प्रतिनिधि माइक वॉल्ज ने गुरुवार को वॉशिंगटन के अनुरोध पर बुलाई गई आपात बैठक में कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक्शन लेने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि प्रदर्शनकारियों के नरसंहार को रोकने के लिए सभी विकल्प खुले हैं।”
ईरान के उप-स्थायी प्रतिनिधि घोलामहुसैन दारज़ी ने हालांकि यह कहते हुए बात को संतुलित करने की कोशिश की कि ईरान तनाव नहीं चाहता, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, “किसी भी तरह की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आक्रामक कार्रवाई का निर्णायक, संतुलित और कानूनी जवाब दिया जाएगा।”
इससे पहले सप्ताह में राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई की धमकी देते हुए कहा था, “सेना इस पर नजर रखे हुए है और हम कुछ बेहद कड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।”
हालांकि बुधवार को ट्रंप ने कहा कि तेहरान ने संकेत दिया है कि वह प्रदर्शनकारियों की प्रस्तावित फांसी रोक रहा है, जिसकी बाद में ईरान ने भी पुष्टि की। गुरुवार को एनबीसी से बातचीत में ट्रंप ने दावा किया, “हमने कल बहुत सी जानें बचाईं।”
वॉल्ज के बयान से यह संकेत मिला कि यदि ईरान ने दोबारा प्रदर्शनकारियों पर दमन तेज किया तो कार्रवाई का विकल्प खुला रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में जारी उथल-पुथल का असर उसकी सीमाओं से बाहर भी पड़ेगा।
उन्होंने कहा, “ईरानी शासन द्वारा अपने ही नागरिकों पर की जा रही हिंसा और दमन का अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर प्रभाव पड़ेगा।” वॉल्ज ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान संवाद की बात तो करता है, लेकिन उसके कदम कुछ और ही दर्शाते हैं।
ईरान के प्रतिनिधि दारज़ी ने अमेरिका पर देश में अशांति भड़काने का आरोप लगाया, जिसे वॉल्ज ने सिरे से खारिज कर दिया।
संयुक्त राष्ट्र की सहायक महासचिव मार्था पोबी, जिन्होंने परिषद को जानकारी दी, ने कहा कि महंगाई और रियाल की गिरती कीमत के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शन, जो पिछले महीने के अंत में शुरू हुए थे और पिछले सप्ताह तेज हुए, अब धीमे पड़ रहे हैं।
उन्होंने कहा, “ईरान की स्थिति अस्थिर और बेहद चिंताजनक बनी हुई है। प्रदर्शन जारी हैं, हालांकि कथित तौर पर पिछले सप्ताह की तुलना में कम पैमाने पर।”
बिना किसी देश का नाम लिए उन्होंने कहा, “ईरान पर संभावित सैन्य हमलों को लेकर दिए जा रहे सार्वजनिक बयानों पर हमें गहरी चिंता है। यह बाहरी पहलू पहले से ही विस्फोटक हालात को और अस्थिर कर सकता है।”
पोबी ने यह भी बताया कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेस ने ईरान में अत्यधिक बल प्रयोग की खबरों पर गंभीर चिंता जताई है और आगे किसी भी तरह की जानमाल की हानि रोकने की तत्काल जरूरत पर जोर दिया है।
इस बीच रूस और चीन ने ईरान का समर्थन करते हुए अमेरिका पर तीखे हमले किए। चीन के उप-स्थायी प्रतिनिधि सुन लेई ने कहा कि किसी भी तरह का “सैन्य दुस्साहस” पूरे क्षेत्र को अस्थिरता की ओर धकेल देगा।
रूस के स्थायी प्रतिनिधि वासिली नेबेंज़िया ने अमेरिका पर ईरान को लेकर “हिस्टीरिया फैलाने” का आरोप लगाया और कहा कि सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाने का उद्देश्य “अप्रिय शासन को सैन्य हमलों के जरिए गिराने” की कोशिशों को वैध ठहराना है।
With inputs from IANS