
वॉशिंगटन- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डिएगो गार्सिया सैन्य अड्डे का नियंत्रण मॉरीशस को सौंपने और फिर उसे लीज पर वापस लेने की ब्रिटेन की योजना का विरोध किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि लंदन ऐसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संसाधन को क्यों छोड़ना चाहता है।
व्हाइट हाउस में अपने दोबारा सत्ता में लौटने के एक साल पूरे होने के मौके पर मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि वह हिंद महासागर में स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया से जुड़ी इस व्यवस्था के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा, “मैं इसके खिलाफ हूं,” और इस क्षेत्र को “दुनिया का एक काफी अहम इलाका” बताया।
ट्रंप ने कहा कि पहले की चर्चाओं में स्वामित्व बनाए रखने की बात हो रही थी, लेकिन मौजूदा प्रस्ताव उन्हें लीज और बिक्री जैसी व्यवस्था लगता है। उन्होंने कहा, “जब शुरुआत में इस पर बात हुई थी, तब किसी तरह के स्वामित्व की अवधारणा थी। अब वे इसे मूल रूप से लीज पर देकर बेचने की दिशा में जा रहे हैं और मैं इसके खिलाफ हूं।”
उन्होंने इस कदम के पीछे ब्रिटेन की मंशा पर भी सवाल उठाया। ट्रंप ने कहा, “मुझे नहीं पता कि वे ऐसा क्यों कर रहे हैं। क्या उन्हें पैसों की जरूरत है?”
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला “ग्रीनलैंड जैसा नहीं है,” लेकिन इसके बावजूद डिएगो गार्सिया सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने यह नहीं बताया कि अमेरिका इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठा सकता है, लेकिन उन्होंने अपनी असहमति साफ तौर पर जाहिर कर दी।
यह प्रस्ताव यूनाइटेड किंगडम और मॉरीशस के बीच ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी के भविष्य से जुड़ा है, जिसमें डिएगो गार्सिया भी शामिल है। इस द्वीप पर एक प्रमुख अमेरिकी सैन्य अड्डा है, जिसका इस्तेमाल मध्य पूर्व, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में हवाई और नौसैनिक अभियानों के लिए किया जाता है।
ट्रंप की यह टिप्पणी उस समय आई जब वह ग्रीनलैंड सहित कई रणनीतिक मुद्दों पर सवालों का जवाब दे रहे थे। जब उनसे पूछा गया कि ग्रीनलैंड के मामले में वह कितनी दूर तक जा सकते हैं, तो उन्होंने कहा, “आप देखेंगे,” और संकेत दिया कि टैरिफ या अन्य उपायों का इस्तेमाल किया जा सकता है। डिएगो गार्सिया के मुद्दे पर उनका रुख कहीं अधिक सख्त नजर आया।
उन्होंने भारत का कोई उल्लेख नहीं किया, लेकिन प्रमुख समुद्री मार्गों के पास स्थित होने के कारण यह अड्डा व्यापक इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है। लंबे समय से इसे हिंद महासागर में अमेरिका और उसके सहयोगियों की सैन्य मौजूदगी का अहम स्तंभ माना जाता रहा है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि वह दावोस जा रहे हैं और वहां कई बैठकें निर्धारित हैं, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इस सैन्य अड्डे पर सहयोगी देशों के साथ चर्चा होगी या नहीं।
इन बयानों पर सुरक्षा विशेषज्ञों और क्षेत्रीय साझेदारों की करीबी नजर रहने की संभावना है। डिएगो गार्सिया की स्थिति में किसी भी तरह का बदलाव हिंद महासागर में सैन्य रणनीति और शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
With inputs from IANS