बीएलए के समर्थन को तोड़ने के लिए पाकिस्तान बड़े पैमाने पर ‘किल एंड डंप’ नीति की तैयारी में: रिपोर्टBy Admin Thu, 05 February 2026 07:11 AM

नई दिल्ली। बलूचिस्तान में पिछले कुछ दिनों से हिंसा की गंभीर घटनाएं सामने आ रही हैं। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के हाथों भारी नुकसान झेलने के बाद पाकिस्तान में एक बार फिर ‘किल एंड डंप’ नीति लागू किए जाने की आशंका जताई जा रही है।

बताया जाता है कि पाकिस्तान सेना और आईएसआई पहले भी कई बार इस नीति का इस्तेमाल कर चुके हैं। इस अभियान के जरिए उन आवाजों को दबाने की कोशिश की जाती रही है जो पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था के खिलाफ और बलूचिस्तान के समर्थन में उठती रही हैं। एक खुफिया ब्यूरो अधिकारी के अनुसार, बीएलए के खिलाफ संघर्ष में भारी नुकसान के बाद पाकिस्तानी सुरक्षा बल कुछ समय के लिए पीछे हट सकते हैं, क्योंकि बीएलए के खिलाफ लड़ाई में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

अधिकारी ने कहा कि इस रणनीतिक पीछे हटने के दौरान पाकिस्तान की सत्ता व्यवस्था ‘किल एंड डंप’ अभियानों को तेज कर सकती है। बलूच लोगों को आशंका है कि इस बार आम नागरिक भी निशाने पर आ सकते हैं। पाकिस्तान पर चीन और अमेरिका दोनों का दबाव भी बढ़ रहा है। अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ खनिज समझौता किया है, जिसमें बलूचिस्तान की महत्वपूर्ण भूमिका है। वहीं 46 अरब डॉलर के चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) को भी बीएलए से लगातार खतरा बना हुआ है।

बलूचिस्तान के लोगों का कहना है कि उनके खनिज संपन्न क्षेत्र का लाभ केवल पाकिस्तान के प्रभावशाली वर्ग और विदेशी ताकतों को मिल रहा है। पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए चीन और अमेरिका के साथ उसके समझौते बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

एक अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान इन देशों के साथ व्यापार तो करना चाहता है, लेकिन वह बलूच लोगों की आवाज सुनने को तैयार नहीं है। फ्रंटियर कॉर्प्स द्वारा किए जाने वाले कथित गैर-न्यायिक हत्याओं के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। आरोप है कि इस बल को अब ऐसे अभियानों को और तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। बीएलए के उग्रवादियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर आम नागरिकों की भी हत्या की जा रही है।

खुफिया एजेंसियों के अनुसार, जमीनी स्तर पर बीएलए का मुकाबला करने में असफल रहने के बाद फ्रंटियर कॉर्प्स निर्दोष लोगों, महिलाओं और बच्चों को निशाना बना सकती है। बलूच समुदाय पहले ऐसी घटनाओं को धीमी गति से चल रहे नरसंहार के रूप में बता चुका है, लेकिन अब आशंका जताई जा रही है कि सुरक्षा बल बड़े पैमाने पर हिंसक कार्रवाई कर सकते हैं।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि बलूचिस्तान के लोग बड़ी संख्या में बीएलए का समर्थन करते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि यह संगठन उनके अधिकारों के लिए लड़ रहा है। लोगों का यह समर्थन ही सुरक्षा बलों के अभियानों में बाधा बन रहा है, क्योंकि वे बीएलए और सुरक्षा बलों के बीच ढाल का काम करते हैं।

इस कारण खुफिया जानकारी जुटाना भी मुश्किल हो गया है और हाल के कई अभियानों में सुरक्षा बलों की विफलता इसका संकेत मानी जा रही है। भारतीय खुफिया एजेंसियों के अनुसार, जिस स्तर पर हिंसा की योजना बनाई जा रही है, वैसा बलूचिस्तान ने पहले कभी नहीं देखा। फ्रंटियर कॉर्प्स को अधिक से अधिक लोगों को निशाना बनाने और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ भी कार्रवाई करने के निर्देश दिए जाने की आशंका जताई गई है।

मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि ऐसे अभियानों को फ्रंटियर कॉर्प्स, सेना और आईएसआई मिलकर अंजाम देते हैं। फिलहाल बलूचिस्तान से आने वाली कई जानकारियों पर रोक लगा दी गई है। पत्रकारों और मानवाधिकार संगठनों को वहां जाने की अनुमति नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि यह संकेत है कि आने वाले समय में हालात और गंभीर हो सकते हैं।

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2003 से 2012 के बीच लगभग 8,000 लोगों के जबरन गायब होने के मामले सामने आए थे। इन घटनाओं में लोगों को उठा लिया जाता है, हिरासत में लेकर यातनाएं दी जाती हैं और बाद में गोलियों से छलनी शव सड़क पर फेंक दिए जाते हैं, ताकि लोगों में डर पैदा किया जा सके और वे बीएलए जैसे संगठनों का समर्थन करना बंद कर दें।

अधिकारियों का कहना है कि बलूचिस्तान पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए पाकिस्तान के पास या तो संवाद का रास्ता है या फिर कठोर कार्रवाई का। उनका दावा है कि पाकिस्तान बातचीत के बजाय क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए कठोर उपाय अपनाने की दिशा में बढ़ रहा है और ‘किल एंड डंप’ नीति को पहले से अधिक आक्रामक रूप में लागू किया जा सकता है।

 

With inputs from IANS