
नई दिल्ली- जब लाखों युवा पाकिस्तान की ऐसी अर्थव्यवस्था में प्रवेश कर रहे हैं जो व्यापक आर्थिक अस्थिरता और नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण विस्तार नहीं कर पा रही है, तब देश को घरेलू अशांति और तेजी से बढ़ते बाहरी पलायन जैसे “दोहरे खतरे” का सामना करना पड़ रहा है। यह चेतावनी एक नई रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को अगले दशक में 2.5 से 3 करोड़ नौकरियां पैदा करनी होंगी, यानी हर साल लगभग 25 से 30 लाख रोजगार सृजित करने की आवश्यकता है।
हालांकि, ‘द एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ के संपादकीय में कहा गया है कि मजबूत निजी अर्थव्यवस्था के बिना इतनी बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करना संभव नहीं है।
संपादकीय में चिंता जताई गई है कि यदि असमानता और बढ़ती है, तो अधिक युवा रोज़गार की तलाश में विदेश जाने को मजबूर होंगे, जिससे देश की मानव पूंजी कमजोर हो जाएगी।
विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने हाल ही में कहा था कि यदि तत्काल और निरंतर रोजगार सृजन नहीं किया गया, तो पाकिस्तान आर्थिक लाभ के बजाय अस्थिरता का कारण बन सकता है।
इसके परिणाम पहले से ही दिखाई दे रहे हैं। वर्ष 2025 में करीब 4,000 डॉक्टर देश छोड़कर चले गए, जो अब तक का सबसे अधिक वार्षिक पलायन है। रिपोर्ट के अनुसार, खराब कार्य परिस्थितियों और सीमित करियर अवसरों के कारण उच्च प्रशिक्षित पेशेवर भी देश में बने रहने के लिए प्रेरित नहीं हो पा रहे हैं।
पाकिस्तान फिलहाल आईएमएफ के स्थिरीकरण कार्यक्रम से गुजर रहा है और साथ ही विश्व बैंक के साथ 10 वर्षीय कंट्री पार्टनरशिप फ्रेमवर्क लागू करने की तैयारी कर रहा है। इस योजना के तहत सार्वजनिक और निजी निवेश मिलाकर हर साल लगभग 4 अरब डॉलर की वित्तीय सहायता का अनुमान है।
इस ढांचे में यह स्वीकार किया गया है कि सरकार के पास सीमित वित्तीय संसाधन हैं और देश में लगभग 90 प्रतिशत नौकरियां निजी क्षेत्र द्वारा ही सृजित की जाती हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में फ्रीलांसरों की बढ़ती संख्या उद्यमशीलता की क्षमता को दर्शाती है, लेकिन ऋण, बुनियादी ढांचे और नियामकीय सहयोग की कमी के कारण अधिकांश लोग ऐसी कंपनियां नहीं बना पा रहे हैं जो दूसरों को रोजगार दे सकें।
वित्त मंत्रालय की जनवरी 2026 की मासिक आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में 7.6 लाख से अधिक पाकिस्तानी रोजगार के लिए देश छोड़कर विदेश चले गए, जो देश में बढ़ते आर्थिक दबाव और रोजगार के सीमित अवसरों को दर्शाता है।
रिपोर्ट में निर्यात, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और समग्र आर्थिक वृद्धि जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कमजोर प्रदर्शन की भी बात कही गई है।
With inputs from IANS