





नई दिल्ली: यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रिफाइनरी ढांचे को हुए नुकसान के कारण रूस में पेट्रोल की कमी गहराती जा रही है। इस बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस इस संकट से निपटने के लिए भारत से बड़े पैमाने पर समुद्री मार्ग के जरिए पेट्रोल आयात करने की तैयारी कर रहा है।
यूक्रेन स्थित मीडिया संस्थान कीव पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, रूस सरकार अपने टैक्स कानून में संशोधन करने की योजना बना रही है, ताकि भारत से पेट्रोल आयात करने वाली कंपनियों को सब्सिडी दी जा सके। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सब्सिडी की गणना भारत में पेट्रोल की अनुमानित कीमत और भारतीय बंदरगाहों से रूस तक ईंधन पहुंचाने की परिवहन लागत के आधार पर की जाएगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस की संसद की बजट एवं कर समिति ने इस विधेयक का समर्थन किया है। यह जानकारी रूसी मीडिया संस्थान आरबीसी की रिपोर्ट के हवाले से दी गई है।


यूक्रेन के साथ युद्ध के बाद भारत रूस से कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर उभरा है। भारत प्रतिदिन 15 से 20 लाख बैरल रूसी कच्चे तेल की खरीद करता रहा है, जो जून 2026 में बढ़कर रिकॉर्ड 26.6 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई। इस तेल का एक हिस्सा भारतीय रिफाइनरियों में प्रोसेस होने के बाद पेट्रोल सहित अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के रूप में दूसरे देशों को निर्यात किया जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में भारत का पेट्रोल निर्यात रिकॉर्ड चार लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया था, जिसका अधिकांश हिस्सा एशियाई देशों ने आयात किया।
रूस में 2026 के दौरान रिफाइनरियों पर लगातार हुए ड्रोन हमलों के कारण कच्चे तेल की प्रोसेसिंग क्षमता पिछले दो दशकों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। इससे पेट्रोल उत्पादन में लगभग 25 प्रतिशत की गिरावट आई है।


वर्तमान में रूस की रिफाइनरियां प्रतिदिन करीब 85 हजार टन पेट्रोल का उत्पादन कर रही हैं, जबकि गर्मियों में मांग लगभग 1.11 लाख टन प्रतिदिन है। इस तरह रोजाना करीब 25 हजार टन पेट्रोल की कमी बनी हुई है, जो घरेलू खपत का लगभग 20 प्रतिशत है।
रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोल की कमी के चलते रूस में थोक पेट्रोल की कीमत 100 रूबल प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गई है। हालात ऐसे हैं कि कुछ हल्के विमानों के संचालकों ने विमान ईंधन की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण ऑटोमोबाइल पेट्रोल का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
हालांकि, भारत से पेट्रोल आयात को लेकर रूस सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। यह जानकारी यूक्रेन स्थित कीव पोस्ट की रिपोर्ट पर आधारित है।
With inputs from IANS
