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ताइवान के आसपास चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियां केवल वैज्ञानिक या अनुसंधान अभियानों तक सीमित नहीं हो सकती हैं। एक हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि बीजिंग इन गतिविधियों के जरिए क्षेत्र में रणनीतिक बढ़त बनाने और भविष्य में ताइवान की नाकाबंदी, सैन्य कार्रवाई या जबरन विलय के लिए परिस्थितियां तैयार कर सकता है।
युगांडा स्थित मीडिया आउटलेट PML Daily की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और उसके सहयोगियों को चीन की बढ़ती समुद्री मौजूदगी को संभावित रणनीतिक अभ्यास के रूप में देखना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) द्वारा ऐसे नागरिक जहाजों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनका उपयोग सैन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से चीनी अनुसंधान पोत ‘टोंग जी’ की गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। करीब 2,000 टन का यह पोत 2025 में सेवा में शामिल हुआ था और इसमें उन्नत सोनार, ध्वनिक सेंसर तथा रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स जैसे उपकरण मौजूद हैं। ये तकनीकें समुद्र की तलहटी का नक्शा तैयार करने और ऐसी जानकारी जुटाने में सक्षम हैं, जिसका सैन्य अभियानों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ‘टोंग जी’ मई से अब तक ताइवान के आसपास तीन बार देखा जा चुका है और हर बार वह संवेदनशील नौसैनिक प्रतिष्ठानों के करीब सक्रिय था। हालिया गतिविधि काऊशुंग के पास लियूचिउ द्वीप के दक्षिण-पश्चिम में दर्ज की गई, जहां ताइवान की नौसेना अकादमी और उसका सबसे बड़ा नौसैनिक अड्डा स्थित है।
ताइवान के तटरक्षक बल ने पोत की निगरानी की और उसे चेतावनी भी दी। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि पोत का बार-बार लौटना बीजिंग की रणनीति को लेकर चिंता बढ़ाता है और इसे ताइवान की रक्षा व्यवस्था तथा उसकी प्रतिक्रिया क्षमता को परखने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है।
PML Daily ने इसे चीन की व्यापक समुद्री रणनीति का हिस्सा बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, बीजिंग ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यास के साथ-साथ अनुसंधान जहाजों और कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के गश्ती पोतों की मौजूदगी भी बढ़ा रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जून में जापान और फिलीपींस द्वारा ताइवान के पूर्वी हिस्से में अपनी समुद्री सीमाओं के निर्धारण की योजना की घोषणा के बाद गतिविधियों में तेजी आई। चीन ने इस कदम का विरोध करते हुए इसे अपनी संप्रभुता के खिलाफ बताया था। इसके कुछ समय बाद चीनी पोत ‘लान हाई 201’ ने भी ताइवान के पूर्व में मछली संसाधनों से जुड़ा सर्वेक्षण किया, जिससे उसके अभियान के संभावित दोहरे उपयोग को लेकर सवाल उठे।
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि अनुसंधान पोतों, तटरक्षक गश्त और सैन्य अभ्यासों के संयोजन के जरिए चीन ताइवान को रणनीतिक रूप से घेरने और उसकी स्वायत्तता को कमजोर करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसमें कहा गया है कि बीजिंग ने ताइवान को मुख्य भूमि के साथ फिर से जोड़ने के लिए बल प्रयोग का विकल्प कभी पूरी तरह खारिज नहीं किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, ताइवान के नौसैनिक ठिकानों के आसपास उन्नत सेंसर से लैस जहाजों की मौजूदगी से चीन को समुद्र की तलहटी, पनडुब्बी संचालन और पनडुब्बी रोधी युद्ध से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। ऐसी जानकारी भविष्य में नाकाबंदी या सैन्य अभियान की स्थिति में रणनीतिक महत्व रख सकती है।
हालांकि, रिपोर्ट में किए गए इन आकलनों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए गए तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि PML Daily द्वारा प्रस्तुत विश्लेषण और आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए। ताइवान के आसपास चीन की समुद्री और सैन्य गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से पहले से ही अमेरिका, जापान और अन्य देशों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।