BRICS का एकतरफा टैरिफ पर प्रहार, WTO आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था के समर्थन में नई दिल्ली घोषणाBy IANS Sat, 12 September 2026 06:10 PM

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BRICS देशों ने एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापारिक उपायों पर कड़ी चिंता जताते हुए नियम आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया है। शनिवार को BRICS देशों ने सर्वसम्मति से नई दिल्ली घोषणा को अपनाया, जिसमें विश्व व्यापार संगठन (WTO) को वैश्विक बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था के केंद्र में बनाए रखने पर जोर दिया गया।

घोषणा में कहा गया कि एकतरफा टैरिफ और ऐसे गैर-टैरिफ उपाय जो व्यापार को विकृत करते हैं और WTO के नियमों के अनुरूप नहीं हैं, वैश्विक व्यापार के लिए गंभीर चुनौती हैं।

BRICS देशों ने WTO में सुधार के लिए अपना “अटूट समर्थन” दोहराते हुए एक ऐसी बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई, जो गैर-भेदभावपूर्ण, खुली, समान, पारदर्शी, निष्पक्ष, समावेशी और पूर्वानुमान योग्य हो तथा स्पष्ट नियमों पर आधारित हो।

विकासशील देशों की वैश्विक व्यापार व्यवस्था में मजबूत भागीदारी पर जोर

नई दिल्ली घोषणा में ग्लोबल साउथ की उस आकांक्षा को भी समर्थन दिया गया है, जिसके तहत विकासशील देशों को बहुपक्षीय व्यापार व्यवस्था में अधिक प्रभावी और पूर्ण भागीदारी मिल सके।

BRICS ने इथियोपिया और ईरान के WTO में शामिल होने के प्रयासों का मजबूत समर्थन किया। घोषणा में चीन की उस पहल का भी उल्लेख किया गया, जिसके तहत उसने अपने साथ राजनयिक संबंध रखने वाले 53 अफ्रीकी देशों तक शून्य-टैरिफ व्यवस्था का विस्तार किया है।

एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का भी विरोध

BRICS देशों ने अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत लगाए जाने वाले एकतरफा दबावपूर्ण उपायों की भी निंदा की। घोषणा में कहा गया कि एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और सेकेंडरी प्रतिबंधों के दूरगामी नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।

BRICS के अनुसार, ऐसे उपाय लक्षित देशों की आम आबादी के मानवाधिकारों को प्रभावित करते हैं और विशेष रूप से विकास, स्वास्थ्य तथा खाद्य सुरक्षा जैसे अधिकारों पर असर डालते हैं। इनका सबसे अधिक प्रभाव गरीबों और कमजोर परिस्थितियों में रह रहे लोगों पर पड़ सकता है।

घोषणा में यह भी कहा गया कि ऐसे प्रतिबंध डिजिटल विभाजन को बढ़ाने और पर्यावरणीय चुनौतियों को और गंभीर बनाने का काम कर सकते हैं। BRICS देशों ने ऐसे गैरकानूनी उपायों को समाप्त करने की मांग की।

IMF और विश्व बैंक में विकासशील देशों की हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग

BRICS ने वैश्विक आर्थिक शासन में सुधार को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल रखा है। घोषणा के मुताबिक, वैश्विक उत्पादन और आर्थिक वृद्धि में उभरती तथा विकासशील अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में इन देशों की आवाज और प्रतिनिधित्व भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए।

BRICS देशों ने IMF और विश्व बैंक सहित अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए आपसी समन्वय मजबूत करने पर सहमति जताई।

घोषणा में एक मजबूत, कोटा आधारित और पर्याप्त संसाधनों वाले IMF को वैश्विक वित्तीय सुरक्षा तंत्र के केंद्र में बनाए रखने की जरूरत बताई गई, ताकि वह विशेष रूप से कमजोर देशों को प्रभावी सहायता उपलब्ध करा सके।

BRICS ने 16वें General Review of Quotas (GRQ) के तहत सहमत कोटा वृद्धि को बिना और देरी के लागू करने की मांग की। साथ ही 17वें GRQ के तहत कोटा में सार्थक पुनर्संतुलन के लिए जल्द से जल्द ठोस उपाय विकसित करने का आह्वान किया।

विश्व बैंक में विकासशील देशों की आवाज बढ़ाने पर जोर

घोषणा में 2025 World Bank Shareholding Review को भी बहुपक्षवाद को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया। BRICS का मानना है कि इसके जरिए विश्व बैंक समूह को अधिक प्रभावी और विकास वित्त के लिए बेहतर संस्थान बनाया जा सकता है।

BRICS देशों ने विकासशील देशों की आवाज और प्रतिनिधित्व बढ़ाने के प्रयास जारी रखने का फैसला किया है। इसके लिए शेयरहोल्डिंग में ऐसा पुनर्संतुलन करने की वकालत की गई है, जो लंबे समय से चली आ रही विकासशील देशों की कम प्रतिनिधित्व वाली स्थिति को दूर कर सके।

नई दिल्ली घोषणा से स्पष्ट है कि BRICS केवल व्यापारिक सहयोग तक सीमित एजेंडे के बजाय वैश्विक आर्थिक और वित्तीय व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने पर भी जोर दे रहा है। एकतरफा टैरिफ, आर्थिक प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दे अब समूह के व्यापक वैश्विक आर्थिक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं।