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बांग्लादेश की कुछ गारमेंट फैक्ट्रियों में कर्मचारियों के अचानक बीमार पड़ने और बेहोश होने की घटनाओं के बाद ‘भूत’ और ‘जिन्न’ के साए की अफवाहों ने दहशत पैदा कर दी है। हालांकि, विशेषज्ञों और श्रमिक नेताओं के मुताबिक, इन घटनाओं के पीछे कार्यस्थल का तनाव, कुपोषण, मानसिक दबाव और सामूहिक मनोवैज्ञानिक प्रतिक्रिया जैसे कारण हो सकते हैं।
बांग्लादेश के प्रमुख बंगाली दैनिक ‘प्रोथोम आलो’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक दशक में गारमेंट सेक्टर में इस तरह की कम से कम 11 घटनाएं सामने आई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2008 में इस तरह की घटनाएं कई फैक्ट्रियों में हुई थीं और वह साल इस तरह के मामलों के लिहाज से सबसे अधिक प्रभावित रहा।
हाल की एक घटना 22 अगस्त को नारायणगंज स्थित आदमजी एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन की एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड गारमेंट फैक्ट्री यूनिवर्सल मेन्सवियर में हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, लंच ब्रेक के बाद तीसरी मंजिल पर काम कर रही एक महिला कर्मचारी ने ‘भूत’ देखने का दावा किया और बेहोश हो गई।
इसके बाद फैक्ट्री में तेजी से अफरा-तफरी फैल गई। दूसरी और तीसरी मंजिल पर काम कर रहे करीब 50 कर्मचारियों ने भी तबीयत खराब होने की शिकायत की। स्थिति को देखते हुए प्रबंधन को उस दिन फैक्ट्री बंद करनी पड़ी। अगले दिन भी ऐसी ही घटना दोहराए जाने के बाद फैक्ट्री को फिर बंद करना पड़ा।
नारायणगंज का आदमजी एक्सपोर्ट प्रोसेसिंग जोन ढाका के बाहरी इलाके का एक प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र है, जहां कपड़ा और अन्य उद्योगों की बड़ी मौजूदगी है।
‘प्रोथोम आलो’ की रिपोर्ट के मुताबिक, ऐसी घटनाओं में अक्सर अफवाहों से शुरुआत होती है। कई मामलों में फैक्ट्री के बाथरूम या किसी खास जगह पर ‘भूत’ होने की चर्चा फैलती है या किसी कर्मचारी के ‘जिन्न के कब्जे’ में होने की बात कही जाती है। इसके बाद किसी एक कर्मचारी के बीमार पड़ने के बाद दूसरे कर्मचारियों में भी अचानक समान लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
गारमेंट वर्कर्स यूनिटी फोरम की अध्यक्ष नाजमा अख्तर ने इन घटनाओं को समझाते हुए महिला श्रमिकों पर पड़ने वाले शारीरिक और मानसिक दबाव का उल्लेख किया। उनके मुताबिक, कम वेतन के कारण कई श्रमिक पर्याप्त पौष्टिक भोजन नहीं ले पाते, जबकि पारिवारिक समस्याएं मानसिक तनाव को और बढ़ा सकती हैं। कई कर्मचारी तबीयत खराब होने के बावजूद काम पर पहुंचते हैं।
रिपोर्ट में फैक्ट्री प्रबंधन और श्रमिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भी काम का दबाव, कुपोषण, अंधविश्वास और मनोवैज्ञानिक प्रभाव को इन घटनाओं के संभावित कारणों में गिनाया है। हालांकि, कुछ फैक्ट्री मालिकों ने आशंका जताई कि उत्पादन बाधित करने के लिए कुछ समूह जानबूझकर अफवाहें फैला सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
मनोचिकित्सा विशेषज्ञ प्रोफेसर हेलाल उद्दीन अहमद ने रिपोर्ट में बताया कि चक्कर आना, मितली और पेट दर्द जैसे लक्षण कन्वर्जन डिसऑर्डर से जुड़े हो सकते हैं। इसे Functional Neurological Disorder (FND) भी कहा जाता है। इसमें व्यक्ति को कमजोरी, दौरे या संवेदना में बदलाव जैसे वास्तविक न्यूरोलॉजिकल लक्षण महसूस हो सकते हैं, लेकिन जांच में किसी स्पष्ट संरचनात्मक न्यूरोलॉजिकल बीमारी का पता नहीं चलता।
विशेषज्ञ के अनुसार, जब इस तरह के लक्षण एक समूह में तेजी से फैलते हैं, तो इसे Mass Psychogenic Illness यानी सामूहिक मनोवैज्ञानिक बीमारी कहा जाता है। इस तरह की घटनाएं स्कूलों, हॉस्टलों और फैक्ट्रियों जैसे सामूहिक वातावरण में देखी जा सकती हैं।
प्रोफेसर अहमद ने ऐसे मामलों से निपटने के लिए कर्मचारियों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता, काउंसलिंग, आराम की बेहतर व्यवस्था और उचित वेतन जैसे उपायों की जरूरत पर जोर दिया।
इस तरह की घटनाएं बांग्लादेश के विशाल गारमेंट उद्योग के लिए केवल अफवाह और अंधविश्वास का मामला नहीं हैं। वे कार्यस्थल पर श्रमिकों के शारीरिक स्वास्थ्य, पोषण, मानसिक तनाव और काम की परिस्थितियों से जुड़े व्यापक सवालों की ओर भी ध्यान खींचती हैं।