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भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सह्याद्रि और दक्षिण कोरियाई नौसेना के गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक पोत आरओकेएस मुनमु द ग्रेट ने दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच परिचालन तालमेल और समुद्री सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से संयुक्त अभ्यास किया। यह अभ्यास बुसान के तट पर भारत-दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के समुद्री चरण के दौरान आयोजित किया गया।
सियोल स्थित भारतीय दूतावास ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि दोनों युद्धपोतों ने अभ्यास के दौरान कई गतिविधियों में हिस्सा लिया। इनमें एक-दूसरे के जहाजों पर हेलीकॉप्टर उतारने, खोज एवं बचाव अभियान (सर्च एंड रेस्क्यू) और अन्य नौसैनिक प्रक्रियाओं का अभ्यास शामिल था। इसका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच बेहतर तालमेल विकसित करना था। अभ्यास के बाद आईएनएस सह्याद्रि अपने अगले मिशन के लिए रवाना हो गया।
इससे पहले पिछले सप्ताह आईएनएस सह्याद्रि ने बुसान में आरओकेएस मुनमु द ग्रेट के साथ प्रशिक्षण गतिविधियों में हिस्सा लेने के बाद द्विपक्षीय अभ्यास के समुद्री चरण के लिए प्रस्थान किया था।
26 से 29 अक्टूबर तक आयोजित अभ्यास के बंदरगाह चरण में पेशेवर आदान-प्रदान, एक-दूसरे के युद्धपोतों का दौरा, खेल गतिविधियां और जहाज पर स्वागत समारोह जैसे कार्यक्रम हुए। इन गतिविधियों का उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी समझ और संबंधों को और मजबूत करना था।
भारतीय दूतावास ने एक्स पर बताया कि बंदरगाह चरण के दौरान दोनों युद्धपोतों के बीच कई प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए गए। एक-दूसरे के जहाजों का दौरा करने के साथ-साथ विशेषज्ञों ने अपने-अपने अनुभव और तकनीकी जानकारी साझा की। खेल प्रतियोगिताओं और जहाज पर आयोजित स्वागत समारोह ने दोनों नौसेनाओं के अधिकारियों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ावा दिया।
दक्षिण कोरिया में भारत के राजदूत गौरंगलाल दास ने भी आईएनएस सह्याद्रि के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन विकास झा और जहाज पर मौजूद अन्य अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने दक्षिण कोरियाई नौसेना के अधिकारियों के साथ जहाज पर आयोजित स्वागत समारोह में भी हिस्सा लिया।
रक्षा मंत्रालय ने पिछले सप्ताह बताया था कि स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और निर्मित गाइडेड-मिसाइल स्टील्थ फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्रि 26 अक्टूबर को भारत-दक्षिण कोरिया द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने के लिए बुसान नौसैनिक बंदरगाह पहुंचा था।
मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा हिंद-प्रशांत क्षेत्र में दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग और परिचालन तालमेल को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। दक्षिण कोरियाई नौसेना ने आईएनएस सह्याद्रि का गर्मजोशी से स्वागत किया, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते सहयोग और मजबूत रणनीतिक साझेदारी को दर्शाता है।
यह अभ्यास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारत और दक्षिण कोरिया की साझा प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है। इसके साथ ही यह मित्र देशों की नौसेनाओं के साथ पेशेवर संवाद और परिचालन सहयोग के जरिए दीर्घकालिक साझेदारी विकसित करने के भारतीय नौसेना के प्रयासों को दर्शाता है।