पीओके में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच ड्रोन और भारी हथियारों का इस्तेमाल, पाकिस्तानी कार्रवाई तेजBy IANS Fri, 06 November 2026 04:44 PM

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नई दिल्ली। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में एक बार फिर विरोध प्रदर्शनों ने व्यापक रूप ले लिया है। बुनियादी सुविधाओं और मौलिक अधिकारों की मांग को लेकर तीन महीने से अधिक समय से जारी आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई तेज हो गई है। अब निजी घरों और प्रदर्शन स्थलों के आसपास ड्रोन के इस्तेमाल की खबरों ने क्षेत्र में तनाव और बढ़ा दिया है।

अधिकारियों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, आंसू गैस, गोलीबारी और लाठीचार्ज जैसी कार्रवाइयों के बावजूद प्रदर्शनकारियों के पीछे नहीं हटने के बाद सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर ड्रोन के जरिए रिहायशी मकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इसे आंदोलन को दबाने के प्रयासों में एक नई और गंभीर बढ़ोतरी के रूप में देखा जा रहा है।

एक अधिकारी ने कहा कि पहले बल प्रयोग के तरीकों से प्रदर्शनकारियों को रोकने में सफलता नहीं मिलने के बाद ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि दमनकारी कार्रवाई का उल्टा असर हुआ है और इससे लोग आंदोलन में और अधिक संख्या में शामिल होने के लिए प्रेरित हुए हैं।

शुरुआत में संयुक्त एक्शन अवामी कमेटी (जेएएसी) जैसे संगठन आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन अब यह व्यापक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। इसका प्रभाव रावलाकोट से आगे बढ़कर पीओके की राजधानी मुजफ्फराबाद तक पहुंच गया है।

छेहला विश्वविद्यालय और जामिया कश्मीर मुजफ्फराबाद के छात्र भी अब विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो गए हैं। छात्रों ने सड़कों पर उतरकर उन लोगों के प्रति एकजुटता जताई है, जो पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि छात्रों का जेएएसी के समर्थन में आंदोलन से जुड़ना पाकिस्तानी प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। उनके मुताबिक, इससे आंदोलन के विस्तार और लोगों के विरोध जारी रखने के संकल्प का पता चलता है।

अधिकारियों ने दावा किया कि ड्रोन का इस्तेमाल केवल रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि प्रदर्शन स्थलों के आसपास हमले करने के लिए भी किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने यह आरोप भी लगाया है कि क्षेत्र में ड्रोन की तैनाती के साथ भारी हथियारों की नई खेप पहुंचाई जा रही है।

एक खुफिया ब्यूरो अधिकारी के अनुसार, ड्रोन और भारी हथियारों की तैनाती क्षेत्र में हिंसा बढ़ने की आशंका का संकेत है। उन्होंने नागरिकों के हताहत होने की आशंका भी जताई है।

इसी बीच, पाकिस्तान में मीडिया पर पाबंदियां और सख्त किए जाने का दावा किया गया है। एक अधिकारी ने कहा कि पहले भी मीडिया पर नियंत्रण था और सरकारी पक्ष से जुड़ी खबरें प्रसारित की जा रही थीं, लेकिन अब पीओके में जारी घटनाक्रम को लेकर पूरी तरह समाचार ब्लैकआउट जैसी स्थिति बन गई है। उनके अनुसार, पाकिस्तानी मीडिया में इस क्षेत्र के विरोध प्रदर्शनों को जगह नहीं मिल रही है।

इसके बावजूद पीओके में प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि जेएएसी सहित विभिन्न समूहों से किए गए वादे पूरे नहीं होने के कारण लोगों में नाराजगी और बढ़ी है।

रावलाकोट का डी-चौक आंदोलन का सबसे बड़ा प्रदर्शन स्थल बना हुआ है, जहां सुरक्षा बलों की तैनाती सबसे अधिक बताई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, वहां बल प्रयोग के बावजूद प्रदर्शनकारी डटे हुए हैं।

पिछले कुछ सप्ताहों में प्रदर्शन स्थलों पर कथित तोड़फोड़ और आंदोलन को कमजोर करने की कोशिशों के आरोप भी सामने आए हैं। आरोप है कि प्रशासन समर्थक तत्वों को प्रदर्शनकारियों के बीच भेजकर आंदोलन को बाधित करने का प्रयास किया गया।

हाल की एक घटना में सादे कपड़ों में तीन सुरक्षाकर्मियों के प्रदर्शन स्थल में घुसने और प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर इस प्रयास को विफल कर दिया।

इस घटनाक्रम के बीच संयुक्त राष्ट्र के छह मानवाधिकार विशेषज्ञों ने जेएएसी को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन घोषित करने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उनका हस्तक्षेप इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार चर्चा के केंद्र में लाता है।

एक अधिकारी ने आरोप लगाया कि जेएएसी को प्रतिबंधित संगठन घोषित करने का उद्देश्य प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग को उचित ठहराना है। उनके अनुसार, पाकिस्तान प्रशासन आंदोलन को आम नागरिकों के विरोध के बजाय आतंकवादी संगठनों से जुड़ी गतिविधि के रूप में पेश करना चाहता है।

पीओके में जारी आंदोलन, छात्रों की बढ़ती भागीदारी, सुरक्षा बलों की तैनाती और मीडिया पर कथित पाबंदियों के बीच स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, ड्रोन हमलों, भारी हथियारों की तैनाती और कथित घुसपैठ से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।