यूपीआई लेनदेन अगस्त में पहली बार 20 अरब के पार, मूल्य ₹24.85 लाख करोड़By Admin Mon, 01 September 2025 06:14 AM









नई दिल्ली- डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए, यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) ने अगस्त माह में अपने इतिहास में पहली बार 20 अरब लेनदेन का आंकड़ा पार कर लिया। राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में यूपीआई लेनदेन 20.01 अरब तक पहुंच गया, जो जुलाई (19.47 अरब) की तुलना में 2.8 प्रतिशत अधिक है। साल-दर-साल आधार पर यह 34 प्रतिशत की वृद्धि है।

मूल्य के लिहाज से, अगस्त में यूपीआई के जरिए ₹24.85 लाख करोड़ के लेनदेन हुए, जो पिछले साल की तुलना में 24 प्रतिशत ज्यादा है। औसतन प्रतिदिन 645 मिलियन लेनदेन दर्ज हुए, जबकि जुलाई में यह 628 मिलियन था। वहीं, रोज़ाना का लेनदेन मूल्य ₹80,177 करोड़ रहा।

गौरतलब है कि 2 अगस्त को यूपीआई ने एक दिन में 700 मिलियन लेनदेन का रिकॉर्ड भी बनाया था। यह मील का पत्थर ऐसे समय पर हासिल हुआ जब पिछले कुछ महीनों से यूपीआई का ग्रोथ ट्रेंड लगातार बना हुआ है, भले ही वास्तविक धन आधारित गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लागू किया गया हो।

जून में यूपीआई ने 18.40 अरब लेनदेन दर्ज किए थे जिनकी कीमत ₹24.04 लाख करोड़ थी। इसके बाद जुलाई में इसमें 5.8 प्रतिशत की तेज वृद्धि हुई और लेनदेन 19.47 अरब तक पहुंचा, जिनका मूल्य ₹25.08 लाख करोड़ था।

एसबीआई रिसर्च की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में महाराष्ट्र डिजिटल भुगतान में सबसे आगे रहा, जिसकी हिस्सेदारी 9.8 प्रतिशत रही। इसके बाद कर्नाटक (5.5 प्रतिशत) और उत्तर प्रदेश (5.3 प्रतिशत) का स्थान रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, जून 2020 में कुल मूल्य लेनदेन में पीयर-टू-मर्चेंट (P2M) ट्रांजैक्शंस का हिस्सा मात्र 13 प्रतिशत था, जो जुलाई 2025 में बढ़कर 29 प्रतिशत हो गया। वहीं, वॉल्यूम में यह 39 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है, जो डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन की तेज़ी को दर्शाता है।

डिजिटल भुगतान, खासतौर पर यूपीआई, तेजी से बढ़ रहा है और यह वृद्धि नकदी प्रचलन (CIC) से कहीं अधिक है। अप्रैल-जुलाई 2025 के दौरान मासिक औसत यूपीआई लेनदेन ₹24,554 अरब रहा, जबकि CIC में मासिक औसत वृद्धि मात्र ₹193 अरब रही।

वर्तमान में करीब 300 प्रमुख व्यापारी श्रेणी कोड (MCCs) हैं, जबकि एनपीसीआई ने शुरुआत केवल 29 से की थी। जुलाई 2025 में शीर्ष 15 श्रेणियों का वॉल्यूम में 70 प्रतिशत और मूल्य में 47 प्रतिशत योगदान रहा।

इनमें किराना स्टोर्स का हिस्सा वॉल्यूम में 24.3 प्रतिशत और मूल्य में 8.8 प्रतिशत रहा। वहीं, कर्ज वसूली एजेंसियों की हिस्सेदारी मूल्य में 12.8 प्रतिशत रही, लेकिन वॉल्यूम में केवल 1.3 प्रतिशत।

 

With inputs from IANS

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