जीएसटी कटौती से दोपहिया वाहनों की मांग में 200 बीपीएस, यात्री वाहनों में 100 बीपीएस की बढ़ोतरी: रिपोर्टBy Admin Fri, 05 September 2025 06:27 AM









नई दिल्ली- देश के ऑटोमोबाइल उद्योग की 90 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले दोपहिया और यात्री वाहन (पीवी) खंडों की मांग में क्रमशः 200 और 100 बेसिस प्वाइंट्स (बीपीएस) की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। यह अनुमान क्रिसिल की शुक्रवार को जारी रिपोर्ट में लगाया गया।

इसके अनुसार, इस वित्त वर्ष में दोपहिया वाहनों की बिक्री में 5-6 प्रतिशत और यात्री वाहनों की बिक्री में 2-3 प्रतिशत वृद्धि हो सकती है।

जीएसटी काउंसिल ने 22 सितम्बर से दो दरों (5% और 18%) की नई संरचना लागू करने का निर्णय लिया है। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक यह कदम समयानुकूल है और ऑटोमोबाइल की मांग को पुनर्जीवित करेगा।

मांग बढ़ने के अलावा, सरल कर संरचना से अनुपालन आसान होगा और राज्यों के बीच कराधान को सरल बनाकर लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी, जिससे वैल्यू चेन में लाभप्रदता को बल मिलेगा।

क्रिसिल रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर अनुज सेठी ने कहा, “जीएसटी कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने पर वाहनों की कीमतें 5-10 प्रतिशत तक (छोटे यात्री वाहनों पर 30,000–60,000 रुपये और दोपहिया पर 3,000–7,000 रुपये) घटेंगी।”

उन्होंने कहा कि यह कटौती नवरात्रि और त्योहारी सीजन के साथ मेल खा रही है, जिससे बाजार भावना को समय पर प्रोत्साहन मिलेगा। नए लॉन्च, कम ब्याज दरें और बेहतर सामर्थ्य भी ऑटो सेक्टर के लिए दूसरी छमाही को मजबूत बनाएंगे।

संशोधित जीएसटी संरचना के तहत छोटे यात्री वाहन, 350 सीसी तक के दोपहिया (जो इस खंड की लगभग 90% बिक्री है), वाणिज्यिक वाहन (सीवी) और तिपहिया पर कर दर 28% से घटाकर 18% कर दी जाएगी।

मध्यम और बड़े यात्री वाहनों पर भी 3-7 प्रतिशत की कटौती होगी। वहीं, ट्रैक्टरों पर कर दर 12% और 28% से घटाकर क्रमशः 5% और 18% कर दी जाएगी।

सीवी सेगमेंट के लिए यह कटौती 1 अक्टूबर 2025 से लागू होने वाली अनिवार्य एसी केबिन लागत के असर को संतुलित करेगी।

इसके विपरीत, 350 सीसी से ऊपर की मोटरसाइकिलों पर कर बढ़ाकर 31% (मुआवजा उपकर सहित) से 40% विशेष दर कर दिया जाएगा, जिससे वे महंगी होंगी।

क्रिसिल रेटिंग्स की डायरेक्टर पूनम उपाध्याय ने कहा, “अधिक बिक्री से क्षमता उपयोग और ऑपरेटिंग लीवरेज सुधरेगा, जिससे नकदी प्रवाह और मार्जिन मजबूत होंगे और वाहन निर्माताओं की स्थिर क्रेडिट प्रोफाइल और सुदृढ़ होगी।”

 

With inputs from IANS

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