एक्ट ईस्ट: समावेशी विकास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र ने लागू की कई रूपांतरणकारी पहलेंBy Admin Sat, 13 September 2025 05:40 AM









नई दिल्ली। पूर्वोत्तर क्षेत्र में समावेशी विकास को गति देने के लिए केंद्र सरकार ने अपने एक्ट ईस्ट विज़न के तहत कई रूपांतरणकारी पहलें लागू की हैं।

रेल मंत्रालय क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव ला रहा है। रिकॉर्ड निवेश के जरिए बुनियादी ढाँचे की खामियों को पाटने और कनेक्टिविटी बढ़ाने का काम हो रहा है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014 से अब तक पूर्वोत्तर के लिए रेलवे बजट आवंटन पाँच गुना बढ़कर 62,477 करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें मौजूदा वित्त वर्ष के लिए 10,440 करोड़ रुपये शामिल हैं।

वर्तमान में लगभग 77,000 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएँ चल रही हैं (जिसमें मिजोरम की बैराबी–सैरांग रेल लाइन भी शामिल है)। यह अब तक का सबसे बड़ा निवेश है।

8,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनी 51 किलोमीटर लंबी बैराबी–सैरांग रेल लाइन स्वतंत्रता के बाद पहली बार आइज़ोल को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क से जोड़ेगी। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में 143 पुल और 45 सुरंगों के निर्माण के साथ यह परियोजना इंजीनियरिंग का अद्भुत उदाहरण है। इनमें से एक पुल क़ुतुब मीनार से भी ऊँचा है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने पूर्वोत्तर में 16,207 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया है।

आधिकारिक बयान के अनुसार, “इस प्रतिबद्धता का उल्लेखनीय उदाहरण असम में मंगोलदोई और माजिकुची के बीच 15 किलोमीटर सड़क निर्माण परियोजना है, जिसकी लागत 45.31 करोड़ रुपये है। इसे अगस्त 2025 में मंजूरी दी गई और यह नॉर्थ ईस्ट स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट स्कीम (NESIDS)–Roads के तहत लागू होगी।”

इसके अलावा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अंतर्गत क्षेत्र में 89,436 किलोमीटर लंबाई और 2,398 पुलों को कवर करते हुए 17,637 सड़क कार्य स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 16,469 सड़क कार्य (80,933 किमी) और 2,108 पुल पूरे हो चुके हैं, जिससे दूरस्थ और ग्रामीण इलाकों में अंतिम छोर तक संपर्क (लास्ट माइल कनेक्टिविटी) में व्यापक सुधार हुआ है।

सरकार द्वारा वित्तपोषित भारतनेट और डिजिटल भारत निधि जैसी परियोजनाओं ने डिजिटल कनेक्टिविटी को मज़बूत किया है। इसके अंतर्गत ग्राम पंचायतों को सेवा-तैयार बनाया गया और क्षेत्रभर में मोबाइल टावर स्थापित किए गए।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना – उड़ान (UDAN) शुरू की है, जिससे पहले से उपेक्षित या असुविधाजनक हवाई अड्डों से हवाई सेवाओं की पहुँच बढ़ी है। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र के विभिन्न हवाई अड्डों और हेलीपोर्ट्स को जोड़ने वाले कई मार्ग स्थापित हुए।

पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) आठों पूर्वोत्तर राज्यों को अधोसंरचना, कनेक्टिविटी और संचार से जुड़ी विकासात्मक परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। यह पाँच केंद्रीय क्षेत्रक योजनाओं के माध्यम से किया जा रहा है—NESIDS (Roads), NESIDS (OTRI), PM-DevINE, नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) की योजनाएँ, और विशेष विकास पैकेज (SDPs)।

ख़ास बात यह है कि प्रधानमंत्री विकास पहल फॉर नॉर्थ ईस्ट रीजन (PM-DevINE) एक शत-प्रतिशत केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे केंद्रीय बजट 2022–23 में घोषित किया गया था।

इस योजना का कुल व्यय 6,600 करोड़ रुपये है, जो 2022–23 से 2025–26 की चार-वर्षीय अवधि के लिए निर्धारित है।

इसका उद्देश्य है—PM गति शक्ति फ्रेमवर्क के अनुरूप अभिसरणीय तरीके से अधोसंरचना परियोजनाओं को वित्तपोषित करना, क्षेत्र की विशेष आवश्यकताओं पर आधारित सामाजिक विकास पहल को समर्थन देना, युवाओं और महिलाओं के लिए आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना और विभिन्न क्षेत्रों में विकासात्मक खाइयों को भरना।

हाल ही में आयोजित राइजिंग नॉर्थईस्ट इन्वेस्टर्स समिट 2025 में 4.48 लाख करोड़ रुपये का निवेश प्रस्ताव मिला, जिसमें ऊर्जा, कृषि-खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन, वस्त्र, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, आईटी, मनोरंजन, अधोसंरचना और लॉजिस्टिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विशेष रुचि दिखाई गई।

 

With inputs from IANS

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