गिग इकॉनमी का राजनीतिकरण क्विक कॉमर्स को खत्म कर देगा, नौकरियां नष्ट होंगी: अमिताभ कांतBy Admin Sat, 03 January 2026 04:52 AM









नई दिल्ली — गिग वर्कर्स को लेकर बढ़ती बहस के बीच नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने चेतावनी दी है कि गिग इकॉनमी का राजनीतिकरण करने से क्विक कॉमर्स को भारी नुकसान पहुंचेगा, नौकरियां खत्म होंगी और कामगारों को दोबारा असंगठित क्षेत्र में धकेल दिया जाएगा।

पूर्व जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा और उनकी पार्टी “नौकरी पैदा करने वाले नहीं, बल्कि नौकरी खत्म करने वाले” हैं।

कांत ने लिखा, “गिग नौकरियां 2030 तक 77 लाख से बढ़कर 2.35 करोड़ होने जा रही हैं। यह भारत में रोजगार सृजन के सबसे बड़े इंजनों में से एक है। जिन लोगों ने आज तक एक भी नौकरी नहीं बनाई, उनके द्वारा इसे ‘शोषण’ कहना तथ्य नहीं, बल्कि राजनीति है।”

उन्होंने कहा कि केवल 31 दिसंबर को ही जोमैटो और ब्लिंकिट ने 75 लाख से अधिक ऑर्डर डिलीवर किए। यह मांग उन लाखों भारतीयों से आई, जिन्होंने तेज़ सेवा, सुविधा और बेहतर मूल्य को चुना।

कांत ने जोर देकर कहा, “गिग इकॉनमी का राजनीतिकरण क्विक कॉमर्स को खत्म कर देगा, नौकरियां नष्ट करेगा और कामगारों को फिर से असंगठित क्षेत्र में धकेल देगा, जहां न अधिकार होंगे, न सुरक्षा। @raghav_chadha और आम आदमी पार्टी नौकरी देने वाले नहीं, बल्कि नौकरी खत्म करने वाले हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि बाजार को अपना काम करने देना चाहिए, सामाजिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाना चाहिए और “राजनीतिक हितों के लिए नवाचार को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।”

वहीं, राघव चड्ढा ने शुक्रवार को कहा कि “यह बेहद दुखद है कि जिन लाखों डिलीवरी राइडर्स ने इंस्टेंट-कॉमर्स कंपनियों को आज के मुकाम तक पहुंचाया, उन्हें अपनी बात सुने जाने के लिए विरोध प्रदर्शन करना पड़ रहा है।” उन्होंने कहा कि क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म डिलीवरी राइडर्स की मेहनत और पसीने से खड़े हुए हैं और इसलिए उनके साथ इंसानों जैसा व्यवहार किया जाना चाहिए।

इससे पहले आईएएनएस से बातचीत में चड्ढा ने कम और अनिश्चित आय, लंबे कार्य घंटे, सामाजिक सुरक्षा की कमी और काम में सम्मान के अभाव जैसे मुद्दों पर चिंता जताई थी।

हालांकि, एटरनल (जोमैटो) के संस्थापक दीपिंदर गोयल के अनुसार, वर्ष 2025 में जोमैटो के एक डिलीवरी पार्टनर की औसत प्रति घंटे की कमाई (टिप्स को छोड़कर) 102 रुपये रही।

उन्होंने बताया, “2024 में यह आंकड़ा 92 रुपये था, यानी साल-दर-साल 10.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। लंबे समय में भी प्रति घंटे कमाई में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। अधिकांश डिलीवरी पार्टनर महीने में कुछ ही दिन और कुछ घंटों के लिए काम करते हैं। लेकिन अगर कोई 10 घंटे प्रतिदिन और 26 दिन प्रतिमाह काम करे, तो उसकी कुल मासिक कमाई लगभग 26,500 रुपये होती है। ईंधन और रखरखाव (करीब 20 प्रतिशत) खर्च निकालने के बाद शुद्ध आय लगभग 21,000 रुपये प्रतिमाह रहती है।”

इसके अलावा, डिलीवरी पार्टनर्स को ग्राहकों द्वारा दी गई 100 प्रतिशत टिप्स मिलती हैं।

गोयल ने बताया कि “2025 में जोमैटो पर औसतन प्रति घंटे टिप 2.6 रुपये रही, जबकि 2024 में यह 2.4 रुपये थी। टिप्स तुरंत ट्रांसफर की जाती हैं और इस पर कोई कटौती नहीं होती। पेमेंट गेटवे का पूरा खर्च हम स्वयं वहन करते हैं। जोमैटो पर लगभग 5 प्रतिशत और ब्लिंकिट पर 2.5 प्रतिशत ऑर्डर्स पर टिप दी जाती है।”

उन्होंने यह भी बताया कि 2025 में जोमैटो का एक औसत डिलीवरी पार्टनर साल में 38 दिन और प्रतिदिन करीब 7 घंटे काम करता है, जो तय शेड्यूल के बजाय गिग मॉडल की वास्तविक भागीदारी को दर्शाता है।

 

With inputs from IANS

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