ईयू एफटीए से भारतीय टेक्सटाइल को बांग्लादेश और वियतनाम के बराबर प्रतिस्पर्धा का मौकाBy Admin Sat, 07 February 2026 11:40 AM









नई दिल्ली — भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से भारतीय टेक्सटाइल निर्यात पर लगने वाले शुल्क खत्म हो जाएंगे, जिससे भारत को बांग्लादेश और वियतनाम जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों के बराबर अवसर मिलेंगे। यह जानकारी एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।

समझौते के तहत भारतीय टेक्सटाइल उत्पादों पर ईयू द्वारा लगाए जाने वाले आयात शुल्क को शून्य करने की उम्मीद है। इससे लंबे समय से बनी टैरिफ असमानता खत्म होगी, जिसने क्षेत्र में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को सीमित किया हुआ था।

आईसीआरए की रिपोर्ट के अनुसार, पहले कम शुल्क और विशेष व्यापारिक पहुंच के कारण प्रतिस्पर्धी देशों को ईयू बाजार में मजबूत स्थिति मिलती रही, जबकि भारतीय निर्यातकों को मूल्य निर्धारण से जुड़ी संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ता था।

रिपोर्ट में बताया गया कि ईयू का भारत पर आयात निर्भरता ऐतिहासिक रूप से 5 प्रतिशत से कम रही है, जबकि चीन, बांग्लादेश, तुर्किये और वियतनाम इस क्षेत्र में प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहे हैं।

वर्ष 2025 में भारत का परिधान निर्यात 16 अरब डॉलर से अधिक रहने का अनुमान है, जिसमें करीब एक-तिहाई निर्यात अमेरिका और लगभग 23 प्रतिशत यूरोपीय संघ को जाता है। इससे स्पष्ट है कि यूरोप इस क्षेत्र के लिए प्रमुख निर्यात बाजारों में से एक है।

हालांकि, आईसीआरए रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में खुदरा मांग में सुस्ती, महंगाई के दबाव और वैश्विक खरीदारों द्वारा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने के कारण ईयू को निर्यात लगभग स्थिर बना हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-ईयू एफटीए से विशेष रूप से परिधान और होम टेक्सटाइल क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलेगा, क्योंकि इन्हें शुल्क मुक्त बाजार पहुंच प्राप्त होगी।

रिपोर्ट के अनुसार, “शुल्क समाप्त होने से मूल्य प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, यूरोपीय रिटेलर्स से अधिक सोर्सिंग के अवसर मिलेंगे और यूरोपीय आपूर्ति श्रृंखला में भारत की स्थिति मजबूत होगी। यह समझौता टेक्सटाइल क्षेत्र में निर्यात वृद्धि, प्रतिस्पर्धा में सुधार और दीर्घकालिक निवेश के लिए संरचनात्मक उत्प्रेरक साबित हो सकता है।”

इसके अलावा, व्यापक बाजार पहुंच से टेक्सटाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मजबूती मिलने के साथ-साथ वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में भारत की भागीदारी भी बढ़ने की संभावना है।

 

With inputs from IANS

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