
नई दिल्ली: Indian Institute of Technology Roorkee के शोधकर्ताओं ने भारत में जलवायु अनुकूलन, आपदा तैयारी और जलवायु जोखिम आकलन को मजबूत करने के उद्देश्य से एक नया हाई-रेजोल्यूशन क्लाइमेट प्रोजेक्शन डेटा सेट विकसित किया है। इस ओपन-एक्सेस डेटा सेट का नाम ‘INDRA-CMIP6’ रखा गया है।
आईआईटी रुड़की के हाइड्रोलॉजी विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित इस डेटा सेट को Nature Portfolio की जर्नल Scientific Data में प्रकाशित किया गया है।
यह डेटा सेट भारतीय उपमहाद्वीप के लिए प्रतिदिन के वर्षा और तापमान अनुमान लगभग 10 किलोमीटर के उच्च स्थानिक रिजोल्यूशन पर उपलब्ध कराता है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, मौजूदा वैश्विक जलवायु मॉडल अक्सर भारत की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों, मानसून प्रणाली और क्षेत्रीय मौसम की चरम स्थितियों को सही तरीके से नहीं दर्शा पाते। INDRA-CMIP6 इसी कमी को दूर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
हाल के वर्षों में भारत में जलवायु परिवर्तन का असर तेजी से बढ़ा है। बढ़ता तापमान, अनियमित मानसून, शहरी बाढ़, हीट स्ट्रेस और जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी ड्रेनेज योजना, बाढ़ नियंत्रण, तटबंधों को मजबूत करने और जलवायु-अनुकूल कृषि जैसी योजनाओं के लिए जिला और नदी बेसिन स्तर पर सटीक जलवायु आंकड़ों की जरूरत होती है।
INDRA-CMIP6 डेटा सेट को 14 CMIP6 वैश्विक जलवायु मॉडलों के आउटपुट के आधार पर तैयार किया गया है। इसके लिए Double Bias-Corrected Constructed Analogue (DBCCA) नामक सांख्यिकीय तकनीक का इस्तेमाल किया गया।
शोधकर्ताओं के मुताबिक, यह तकनीक दैनिक मौसम परिवर्तन, क्षेत्रीय वर्षा वितरण और तापमान की चरम स्थितियों को अधिक सटीक तरीके से प्रस्तुत करती है।
डेटा सेट में दैनिक वर्षा, न्यूनतम तापमान और अधिकतम तापमान के अनुमान 0.1° × 0.1° रिजोल्यूशन पर उपलब्ध हैं। इसमें अलग-अलग जलवायु मॉडल आउटपुट के साथ मल्टी-मॉडल एनसेंबल भी दिया गया है, जिससे शोधकर्ता विभिन्न अनुमानों की तुलना कर सकते हैं और अनिश्चितताओं का बेहतर आकलन कर सकते हैं।
तकनीकी परीक्षणों में पाया गया कि INDRA-CMIP6 पारंपरिक वैश्विक जलवायु मॉडलों में मौजूद कई त्रुटियों को काफी हद तक कम करता है। साथ ही यह अत्यधिक वर्षा और तापमान जैसी चरम घटनाओं के अनुमान को भी अधिक सटीक बनाता है।
Ankit Agarwal ने कहा, “भारत में जलवायु जोखिम बेहद स्थानीय स्तर पर प्रभाव डालते हैं, खासकर मानसून और पहाड़ी क्षेत्रों में। ऐसे में INDRA-CMIP6 जैसे फाइन-स्केल क्लाइमेट प्रोजेक्शन वैज्ञानिकों, योजनाकारों और नीति-निर्माताओं के लिए बेहद उपयोगी साबित होंगे।”
वहीं Kamal Kishore Pant ने कहा कि जलवायु परिवर्तन आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और वैज्ञानिक संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे समाज के लिए विश्वसनीय और उपयोगी ज्ञान संसाधन विकसित करें।
उन्होंने कहा कि यह पहल जलवायु लचीलापन, सतत विकास और वैज्ञानिक आधार पर नीति निर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में Indian Institute of Technology Roorkee की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
With inputs from IANS