इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव्स के लिए साइमेंस ने 'पारदर्शी' निविदा प्रक्रिया में अल्स्टॉम को पछाड़ा: रेलवे मंत्रालयBy Admin Tue, 24 June 2025 03:12 AM









नई दिल्ली: रेलवे मंत्रालय ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सिर्फ दो वैश्विक निर्माता—साइमेंस और अल्स्टॉम—ऐसे हैं जो 9000 हॉर्सपावर की इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव्स डिजाइन और निर्माण कर सकते हैं। दोनों कंपनियों ने 2022 में दाहोद फैक्ट्री की निविदा प्रक्रिया में भाग लिया था।

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, "साइमेंस ने सबसे कम और प्रतिस्पर्धी मूल्य के साथ बोली लगाई थी, इसलिए उसे यह ठेका मिला।"

2022 की निविदा प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्रालय ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी रही और इसे तकनीकी एवं वित्तीय विशेषज्ञों की टीम द्वारा मूल्यांकित किया गया।

तकनीकी मूल्यांकन में साइमेंस और अल्स्टॉम दोनों बराबर थे, लेकिन वित्तीय बोली में सबसे कम मूल्य वाले बोलीदाता को अनुबंध दिया गया।

मंत्रालय ने कहा कि यह निविदा उन्हीं मानकों के तहत की गई है जो भारतीय रेलवे की परंपरा रही है। पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुसार, तकनीकी रूप से सक्षम और वित्तीय रूप से योग्य अधिकारियों की टीम द्वारा की गई। इसलिए किसी भी तरह के हितों के टकराव की कोई संभावना नहीं है।

मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि रेलवे मंत्री का निविदा मूल्यांकन प्रक्रिया में कोई दखल नहीं होता। 2016 से रेलवे मंत्रियों द्वारा निविदाओं को मंजूरी देना बंद कर दिया गया है। अब सभी अनुमोदन रेलवे बोर्ड के सदस्य और क्षेत्रीय इकाइयों द्वारा दिए जाते हैं, जिससे संस्थागत पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होती है।

मंत्रालय ने यह भी बताया कि साइमेंस और अल्स्टॉम दोनों दशकों से भारतीय रेलवे के साथ काम कर रही हैं।

पिछले दो दशकों में, भारतीय रेलवे ने लाइफ-साइकल कॉस्ट आधारित खरीद प्रणाली की ओर रुख किया है, जिससे उत्पादों की विश्वसनीयता और यात्रियों की सुरक्षा में वृद्धि हुई है।

दाहोद फैक्ट्री में बनने वाले लोकोमोटिव्स के करीब 89% पुर्जे भारत में ही बनाए जाते हैं। रेलवे के पुर्जों का विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र भारत में तेज़ी से बढ़ रहा है।

बयान में यह भी बताया गया कि लोकोमोटिव्स अत्यंत जटिल मशीनें होती हैं और उनके पुर्जों का निर्माण देश के अलग-अलग हिस्सों में होता है। आज भारत जिस स्तर पर इन जटिल पुर्जों का निर्माण कर पा रहा है, वह बहुत कम देशों में संभव है—यह पिछले एक दशक में मेक इन इंडिया और स्थानीय निर्माण को मिले प्रोत्साहन का परिणाम है।

दाहोद में बने लोकोमोटिव्स का रखरखाव चार डिपो में किया जाएगा—विशाखापत्तनम, रायपुर, खड़गपुर और पुणे, मंत्रालय ने बताया।

 

With inputs from IANS

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