ट्रंप ने 17 विदेशी दवा कंपनियों से अमेरिका में दवाओं की कीमत घटाने को कहा; निफ्टी फार्मा में गिरावटBy Admin Fri, 01 August 2025 07:34 AM









मुंबई: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दुनिया की 17 प्रमुख दवा कंपनियों को अमेरिका में दवाओं की कीमतें घटाने के लिए भेजे गए पत्र से वैश्विक फार्मा बाजार में हलचल मच गई है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा, जिससे निफ्टी फार्मा इंडेक्स शुक्रवार को 2.45 प्रतिशत गिर गया।

ट्रंप के पत्र में इन दवा कंपनियों से कहा गया है कि वे अमेरिका में दवाओं की कीमतें अन्य विकसित देशों के बराबर लाएं। हालांकि किसी भी भारतीय फार्मा कंपनी को यह पत्र नहीं भेजा गया है, लेकिन बाज़ार में इसके असर से तीसरे दिन भी फार्मा शेयरों में गिरावट देखने को मिली।

सुन फार्मास्युटिकल्स के शेयर 3.98% टूटे, ऑरोबिंदो फार्मा 3.42% और ग्रैन्यूल्स इंडिया 3.2% गिर गए। ग्लैंड फार्मा, सिप्ला और लुपिन के शेयरों में भी 2% से 3% की गिरावट आई।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने जिन कंपनियों को पत्र भेजा उनमें एली लिली, नोवो नॉर्डिस्क, फाइजर और अन्य वैश्विक दवा कंपनियां शामिल हैं। ट्रंप ने इन कंपनियों से अमेरिका को ‘मोस्ट फेवर्ड नेशन’ (MFN) जैसी कीमतों पर दवाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, और इसके लिए 60 दिनों का समय दिया है।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने बताया कि हालिया आंकड़े दिखाते हैं कि अमेरिकी नागरिक ब्रांडेड दवाओं के लिए अन्य विकसित देशों की तुलना में तीन गुना ज्यादा कीमत चुका रहे हैं।

गौरतलब है कि ट्रंप इससे पहले भी 12 मई को ऐसा ही बयान दे चुके हैं, जिसमें उन्होंने दवा कंपनियों से अमेरिका में कीमतें घटाने को कहा था। उस समय भारतीय उद्योग जगत ने चिंता जताई थी कि यदि अमेरिका में ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं की कीमतें और घटती हैं, तो भारतीय दवा निर्यात को नुकसान हो सकता है, क्योंकि इनकी कीमत पहले से ही कम होती है। भारत हर साल 30 अरब डॉलर की दवा का निर्यात करता है, जिसमें से एक तिहाई अमेरिका जाता है।

ट्रंप ने अपने पत्र में चेतावनी दी है कि यदि कंपनियां स्वेच्छा से कीमतों में कटौती नहीं करतीं, तो अमेरिका "हर संभव उपाय" अपनाएगा ताकि अमेरिकी नागरिकों को "दवाओं की लूट जैसी कीमतों" से बचाया जा सके।

पत्र में यह भी कहा गया है कि कंपनियों को कुछ विशेष दवाएं बीमा कंपनियों के बजाय सीधे मरीजों को उसी कीमत पर बेचनी होंगी, जिस पर वे इन्हें तीसरे पक्ष (third-party insurers) को बेचती हैं।

 

With inputs from IANS

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