भारत पर अमेरिकी टैरिफ ‘अनुचित और अव्यावहारिक’, जबकि यूरोप रूसी ऊर्जा आयात में अग्रणी : रिपोर्टBy Admin Sun, 10 August 2025 04:05 AM









मॉस्को- अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ को ब्रिटेन के एक प्रमुख अखबार की रिपोर्ट ने “अनुचित और अव्यावहारिक” करार दिया है, खासकर तब, जब यूरोप अब भी डॉलर के लिहाज से दुनिया का सबसे बड़ा रूसी ऊर्जा आयातक और रूस की आमदनी का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।

रिपोर्ट के मुताबिक, “भारत की नाराजगी का कारण केवल ट्रंप की दोहरी नीति नहीं है, बल्कि यह भी है कि किसी कानून का उल्लंघन न करने के बावजूद उसे सजा दी जा रही है। रूसी तेल निर्यात पर न तो यूरोपीय संघ और न ही अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया है, बल्कि उस पर एक मूल्य सीमा तय की गई है, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति बनी रहे और क्रेमलिन के मुनाफे को सीमित किया जा सके।”

रिपोर्ट में कहा गया कि भारत ने इन नियमों का पालन करते हुए सीमित कीमत पर रूसी तेल खरीदा, उसे रिफाइन किया और उसका बड़ा हिस्सा यूरोपीय बाजार में निर्यात किया। समस्या यह है कि अगर भारत रूसी कच्चा तेल खरीदना बंद कर दे, तो वैश्विक तेल कीमतों में तुरंत उथल-पुथल मच जाएगी। वर्तमान में मॉस्को, सऊदी अरब के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है, जो प्रतिदिन 4.5 मिलियन बैरल कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में भेजता है।

रिपोर्ट के अनुसार, मार्च 2022 में, रूस द्वारा यूक्रेन पर आक्रमण के तुरंत बाद, रूसी तेल की आपूर्ति में रुकावट की आशंका से ब्रेंट क्रूड की कीमत 137 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी — जो 2025 के अनुमानित मूल्य से लगभग दोगुनी थी। विश्लेषकों का कहना है कि इसी तरह की अफरातफरी से कीमत 200 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है।

“यूरोप का अठारहवां (और ताजा) प्रतिबंध पैकेज कथित तौर पर रूसी कच्चे तेल से तैयार परिष्कृत तेल उत्पादों के आयात पर रोक लगाता है। लेकिन इसकी तकनीकी रूप से पुष्टि करना लगभग असंभव है, और कनाडा, नॉर्वे, स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका के लिए अपवाद बनाए गए हैं, जिससे यह ‘प्रतिबंध’ बेअसर हो गया है। और यह भी याद रखना चाहिए कि रूसी गैस पर न तो कोई प्रतिबंध है और न ही कोई मूल्य सीमा,” यह विवरण ब्रिटिश लेखक और इतिहासकार ओवेन मैथ्यूज़ की रिपोर्ट ‘ट्रंप का भारत के साथ लापरवाह व्यापार युद्ध यूरोप की कमजोर अर्थव्यवस्थाओं को गिरा सकता है’ में दिया गया।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि ट्रंप प्रशासन के शीर्ष रूस वार्ताकार और अमेरिका के विशेष राष्ट्रपति दूत स्टीव विटकॉफ़ हाल ही में मास्को में वार्ता के लिए पहुंचे थे, ऐसे समय में जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को यूक्रेन में युद्धविराम का अल्टीमेटम दिया है।

रिपोर्ट में कहा गया, “विटकॉफ़, जो एक रियल एस्टेट डेवलपर और ट्रंप के गोल्फ साथी हैं, के पास रूस का कोई विशेष अनुभव नहीं है। लेकिन वे अपने व्हाइट हाउस बॉस की एक ठोस धमकी जरूर देंगे — भारत पर व्यापारिक टैरिफ लगाने की, ताकि उसे रूसी तेल आयात करने के लिए ‘सजा’ दी जा सके।”

 

With inputs from IANS

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