रंग लाई दीपिका और किशोर की मेहनत, JTET नियमावली में बदलाव की तैयारी,मंत्रियों की समिति सुलझाएगी भाषाई विवाद By Admin Fri, 08 May 2026 02:29 PM

Ranchi: अंगिका, भोजपुरी और मगही को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा देने के मामले मे ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडे सिंह और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की मेहनत रंग लानी शुरू कर दी  है। झारखंड सरकार ने JTET नियमावली मे बदलाव की तैयारी शुरू कर दी है। पाँच मंत्रियों की समिति झारखंड मे भाषाई विवाद को सुलझाएगी। झारखंड में शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) की नियमावली में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के समावेश को लेकर राज्य सरकार ने 5 मंत्रियों की हाई-पावर कमेटी बनाई है. कार्मिक विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, विभिन्न जिलों के लिए निर्धारित भाषाओं की सूची में बदलाव, सुधार और नई भाषाओं को जोड़ने या हटाने के बिंदुओं पर विचार करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है. राज्य सरकार ने इस संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय के लिए पांच कैबिनेट मंत्रियों को जिम्मेदारी सौंपी है. वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर को इस समिति का समन्वयक बनाया गया है. समिति के अन्य सदस्यों में श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेन्द्र प्रसाद और नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार शामिल हैं.
समिति की कार्यप्रणाली को सुचारू बनाने के लिए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है. यही विभाग समिति की बैठकों का आयोजन करेगा और सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएगा. अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि यह हाई-पावर कमेटी अपनी रिपोर्ट यथाशीघ्र सरकार को सौंपेगी. 
क्षेत्रीय और जनजातीय भाषाओं पर होगा मंथन
गठित समिति JTET नियमावली में जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के समावेश या विलोपन से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करेगी। लंबे समय से भाषा प्रावधानों को लेकर राज्य में विवाद और मांगें उठती रही हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समिति का उद्देश्य शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में भाषा संबंधी नियमों को स्पष्ट करना और आवश्यक सुधार के सुझाव देना है। 
कैबिनेट मे दीपिका और किशोर ने उठाई थी मांग 
गौरतलब है कि JTET  परीक्षा मे मगही, अंगिका और भोजपुरी को क्षेत्रीय भाषा का दर्ज देने की मांग पिछले दिनों मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता मे सम्पन्न कैबिनेट की बैठक मे ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय  सिंह और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने की थी। दीपिका और किशोर ने कहा था कि राज्य के की जिलों मे मगही, अंगिका और भोजपुरी बोली जाती है। इसलिए इन भाषाओं को भी परीक्षा मे क्षेत्रीय भाषा का दर्ज दिया जाए। जिस कैबिनेट की बैठक मे यह मामला उठा था उस कैबिनेट मे प्रस्ताव को रोक दिया गया लेकिन अगली कैबिनेट की बैठक मे अंगिका, भोजपुरी और मगही भाषा को दरकिनार कर नियमावली पारित कर लिया गया। सरकार ने यह जरूर कहा था कि इन भाषाओं के अध्ययन के लिए एक कमिटी बनाई जाएगी।