देवघर में दीपक कुमार के पहले उपन्यास ‘नॉट ऑल ड्रीम्स गो टू कोटा’ का विमोचनBy Mid Time Correspondent Sun, 13 September 2026 05:39 PM

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शिक्षाविद और लेखक दीपक कुमार के पहले उपन्यास ‘नॉट ऑल ड्रीम्स गो टू कोटा’ का शनिवार को देवघर के वियोरे मॉल स्थित ऑरा लाउंज में आयोजित एक कार्यक्रम में विमोचन किया गया। कार्यक्रम में देवघर की डिप्टी मेयर टिप चटर्जी और ट्रेजरी ऑफिसर सह DIET के फैकल्टी सदस्य मुकेश कुमार सिंह सहित साहित्य और शिक्षा जगत से जुड़े कई लोग मौजूद रहे।

इसी अवसर पर दीपक कुमार के पहले कविता संग्रह ‘खुश्क शीलन’ की कविताओं पर आधारित 11 गीत भी जारी किए गए। कार्यक्रम में सोमेश दत्त मिश्रा, प्रो. अंजनी शर्मा, भारतेन्दु दुबे, उमाकांत सिंह, प्रेम कुमार, अभिषेक आनंद, वैभव शंकर, सुबोध झा, रामसेवक सिंह ‘गुंजन’ और प्रो. रामानंद सिंह समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।

बिहार के जहानाबाद जिले के पंडोई सुल्तानी गांव में जन्मे दीपक कुमार वर्ष 1992 में देवघर आए थे। उन्होंने BIT मेसरा में इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए प्रवेश लिया था, लेकिन दाखिले के अगले ही दिन इसे छोड़कर शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया।

वर्ष 2005 में एक चुनौतीपूर्ण दौर के बाद उन्होंने सीमित संसाधनों और करीब 30 विद्यार्थियों के साथ अपनी शैक्षणिक पहल को नए सिरे से शुरू किया। उनका जोर पढ़ाई को केवल परीक्षा और अंक तक सीमित रखने के बजाय सार्थक सीखने, स्वतंत्र सोच और शिक्षकों के विकास पर रहा।

कोविड-19 महामारी के दौरान दीपक कुमार ने लेखन को अधिक गंभीरता से अपनाया। इसी दौर में लिखी गई उनकी चुनिंदा कविताएं बाद में ‘खुश्क शीलन’ में प्रकाशित हुईं। संग्रह की 11 कविताओं को बाद में गीतों का रूप दिया गया, जिन्हें कार्यक्रम में रिलीज किया गया।

उनका पहला उपन्यास ‘नॉट ऑल ड्रीम्स गो टू कोटा’ भारतीय शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के बीच सफलता को लेकर बनी पारंपरिक धारणाओं पर सवाल उठाता है। उपन्यास में युवाओं की आकांक्षाओं, रिश्तों, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और अपनी राह चुनने की जद्दोजहद जैसे विषयों को भी केंद्र में रखा गया है।

कार्यक्रम के दौरान दीपक कुमार ने उपन्यास के कुछ अंश पढ़कर सुनाए और उपस्थित लोगों के साथ पुस्तक के विषयों तथा इसके पीछे की सोच पर संवाद किया। इस दौरान ‘खुश्क शीलन’ पर आधारित एक वीडियो और उपन्यास पर तैयार किया गया 11 मिनट का पॉडकास्ट भी प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के अंत में अतिथियों को लेखक द्वारा हस्ताक्षरित पुस्तकों की प्रतियां भेंट की गईं। दीपक कुमार ने अपने पाठकों, शिक्षकों, सहयोगियों और शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके समर्थन ने लेखन और शिक्षा के क्षेत्र में उनकी यात्रा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।