कभी साथ थे वाजपेई और ममता, आज क्यों आमने-सामने हैं बीजेपी और TMC?By Admin Thu, 07 May 2026 07:21 PM

कभी दोस्त रहे आज कट्टर दुश्मन 
कुछ सालों पहले की ही बात है ममता बनर्जी के रिश्ते बीजेपी के कई नेताओं से बहुत अच्छे थे... अटल बिहारी वाजपेई।।। राजनाथ सिंह ने कई मौके पर ममता का साथ दिया लेकिन ऐसा क्या हो गया कि यह दोस्ती आज दुश्मनी में बदल गई...

कहते हैं सियासत में कोई भी रिश्ता परमानेंट नहीं होता.. जो कभी दोस्त होते हैं वह सियासी गर्मी के कारण दुश्मन बन जाते हैं...
ममता बनर्जी सत्ता के शीर्ष पर बैठी... सियासत की कई चालें चली... दोस्ती भी की और सत्ता के कटघरे में दुश्मनी भी ले ली... ममता बनर्जी और बीजेपी के बीच कभी अच्छी साठ गाँठ  हुआ करती थी... जब 1998 में ममता बनर्जी ने कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी तो उन्हें एक ऐसे साथी की जरूरत थी जो राष्ट्रीय स्तर पर उन्हें पहचान दे सके और यह साथ उनको मिला बीजेपी की तरफ से... 

अटल बिहारी वाजपेई से तो ममता बनर्जी के इतने अच्छे संबंध थे कि वह वाजपेई सरकार में मंत्री भी बनी... लेकिन 2001 में तहलका स्टिंग ऑपरेशन ने बंगारू लक्ष्मण को सामने ला दिया इसके बाद ममता ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और चप्पलों को लहरा कर कहा कि उनके लिए यह पद चप्पलों से भी छोटा है... यहीं से ममता बनर्जी एनडीए से अलग हो जाती है... लेकिन बीजेपी से रिश्ते उसके खराब नहीं होते हैं...

2006 में जब टाटा सिंगूर नैनो प्लांट का विरोध चल रहा था तब ममता का साथ देने वालों में बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह सामने आए थे... यह वह समय था जब बंगाल में लेफ्ट की सरकार थी लेकिन उसे घटना के बाद 2011 में ममता ने लेफ्ट की सरकार को उखाड़ फेंका और पहली बार मुख्यमंत्री बन गई... और यही वह साल था जब बंगाल में भी बीजेपी और ममता के रास्ते अलग-अलग हो गए...

ममता ने बंगाल में अपने आप को जमीनी नेता के रूप में प्रोजेक्ट करना शुरू कर दिया वहीं भाजपा ने अपनी रणनीति बदली और पार्टी को हिंदुत्व की राह में ले गए... धीरे-धीरे बंगाल में बीजेपी का वोट बैंक बढ़ने लगा , कार्यकर्ताओं में जोश आने लगा, और  बूथ स्तर पर भी काम किए जाने लगे... 2016 में बीजेपी ने तीन सीटें जीती, 2021 में बहुत बड़ा जंप देखते हुए बंगाल में 77 सीटों पर कब्जा जमाया वहीं 2026 के चुनाव में बीजेपी ने ममता को सत्ता से बेदखल ही कर दिया..

 एक दौर था जब  ममता को यह अंदेशा भी नहीं होगा कि जिस बीजेपी ने इसका एक समय में उसका साथ दिया है वही आज उसकी कब्र खोद रहा है... आज दौर  बिल्कुल ही बदल चुका है कभी दोस्त रहे बीजेपी और टीएमसी आज एक दूसरे पर हर तरह के वार करने को तैयार हैं... ममता दिल्ली में सत्ता पर काबिज होने की बात करती है वहीं बीजेपी बंगाल में भगवा लहराने की बात करती है... भाजपा अपनी मिशन में तो कामयाब हो गई लेकिन क्या ममता का सफर यहीं खत्म हो गया