
मुंबई। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से कोई बड़ी रियायत नहीं मिल सकी है। पीसीबी ने मौजूदा आईसीसी टी20 विश्व कप में 15 फरवरी को कोलंबो में भारत के खिलाफ मैच का बहिष्कार न करने पर आईसीसी से कई मांगें रखी थीं।
आईसीसी के साथ बातचीत के दौरान पीसीबी ने राजस्व में अधिक हिस्सेदारी की मांग की थी। इसके अलावा, उसने आईसीसी से भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) से यह अनुरोध करने को कहा था कि वह भारतीय सरकार से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय क्रिकेट संबंधों को फिर से शुरू करने की पहल करे।
पीसीबी ने यह भी मांग की थी कि आईसीसी भारतीय खिलाड़ियों से पाकिस्तान खिलाड़ियों के साथ अपनाई गई ‘नो हैंडशेक’ नीति को खत्म कराने के लिए कदम उठाए। यह नीति 2025 एशिया कप के दौरान शुरू की गई थी।
हालांकि, आईसीसी ने सोमवार को जारी अपने आधिकारिक बयान में पीसीबी की इन मांगों का कोई उल्लेख नहीं किया।
आईसीसी ने अपने बयान में कहा, “आईसीसी और पीसीबी के बीच हुई बातचीत व्यापक संवाद का हिस्सा थी, जिसमें दोनों पक्षों ने खेल के हित में रचनात्मक सहयोग, निष्पक्षता, पारदर्शिता और एकजुटता के साथ आगे बढ़ने की जरूरत को स्वीकार किया।”
आईसीसी का यह बयान पाकिस्तान सरकार द्वारा इस्लामाबाद में जारी उस बयान के तुरंत बाद आया, जिसमें पाकिस्तान टीम को 15 फरवरी को भारत के खिलाफ मैच खेलने की अनुमति दी गई थी।
आईसीसी ने आगे कहा, “इस सकारात्मक माहौल में यह सहमति बनी है कि सभी सदस्य आईसीसी आयोजनों में भागीदारी की शर्तों का सम्मान करेंगे और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे कि आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप का मौजूदा संस्करण सफल हो।”
बांग्लादेश के संदर्भ में आईसीसी ने कहा कि वह देश में क्रिकेट के विकास को बढ़ावा देने की दिशा में सहयोग जारी रखेगा।
आईसीसी ने अपने बयान में कहा, “बांग्लादेश को लेकर आईसीसी ने दोहराया कि वह क्रिकेट के सबसे सक्रिय बाजारों में से एक में खेल के विकास को प्रोत्साहित करता रहेगा। 20 करोड़ से अधिक क्रिकेट प्रेमियों वाले इस देश में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 में राष्ट्रीय टीम की अनुपस्थिति का क्रिकेट पर दीर्घकालिक असर न पड़े।”
With inputs from IANS