
नई दिल्ली: India AI Impact Summit 2026 के समाप्त होने के बाद भले ही सम्मेलन की हलचल थम गई हो, लेकिन इससे निकला संदेश अब भारत की सीमाओं से कहीं आगे तक गूंज रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह साफ संकेत मिला है कि भारत अपनी सशस्त्र सेनाओं को एआई-आधारित युद्ध के नए दौर के लिए तैयार कर रहा है।
सम्मेलन का आधिकारिक फोकस नैतिक और मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास पर था, लेकिन इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बदलाव भी सामने आया।
दशकों तक सैन्य ताकत को सेना के आकार, टैंकों की क्षमता और मिसाइलों की मारक दूरी से आंका जाता था। लेकिन आधुनिक युद्धों में अब सूचना की गति और निर्णय लेने की क्षमता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती जा रही है।
रक्षा रणनीतिकार अब अक्सर OODA Loop की चर्चा करते हैं, जिसका अर्थ है — ऑब्जर्व (Observe), ओरिएंट (Orient), डिसाइड (Decide) और एक्ट (Act)। यह तय करता है कि कोई सेना किसी स्थिति का आकलन कितनी तेजी से कर सकती है और उस पर कितनी जल्दी प्रतिक्रिया दे सकती है।
सम्मेलन के दौरान Strategic Forces Command ने चुपचाप एक स्वदेशी एआई टूल पेश किया, जो भारत की सीमा निगरानी प्रणाली को काफी बदल सकता है।
रिपोर्ट के अनुसार, यह सिस्टम सैटेलाइट इमेजरी, ड्रोन फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक डेटा का विश्लेषण करके Line of Actual Control के आसपास संभावित सैन्य गतिविधियों का लगभग 94 प्रतिशत सटीकता के साथ पता लगा सकता है—यहां तक कि तंबू या सैन्य उपकरण जैसे स्पष्ट संकेत दिखाई देने से पहले ही।
अधिकारियों का कहना है कि यह टूल सेना को असामान्य गतिविधियों की शुरुआती पहचान करने और तेजी से प्रतिक्रिया देने में मदद करेगा।
मानव विश्लेषकों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय यह एआई सिस्टम विशाल मात्रा में डेटा को प्रोसेस करता है और रियल-टाइम जानकारी उपलब्ध कराता है, जिससे कमांडरों को जमीन पर तनाव बढ़ने से पहले ही निर्णय लेने में मदद मिलती है।
सम्मेलन में यह भी बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को धीरे-धीरे तीनों सशस्त्र बलों में शामिल किया जा रहा है।
भारतीय सेना में SAM-UN platform नामक प्लेटफॉर्म के जरिए पुराने टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को अपग्रेड किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन पुराने उपकरणों में एआई-आधारित फायर-कंट्रोल सिस्टम जोड़े जा रहे हैं, जिससे वे बिना नई फ्लीट खरीदे ही आधुनिक युद्धक्षेत्र में प्रभावी बने रह सकते हैं।
With inputs from IANS