




नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में बढ़ती बिजली खपत के बीच बिजली क्षेत्र के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि घोषित क्षमता से अधिक बिजली उपयोग और घरों व प्रतिष्ठानों में असंतुलित विद्युत कनेक्शन स्थानीय स्तर पर होने वाली बिजली कटौती के प्रमुख कारण बन रहे हैं। उन्होंने उपभोक्ताओं से समय रहते आवश्यक सावधानियां बरतने की अपील की है।
विशेषज्ञों के अनुसार बिजली वितरण नेटवर्क को एक निर्धारित क्षमता के अनुसार डिजाइन किया जाता है, जिसमें भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सीमित अतिरिक्त क्षमता रखी जाती है। लेकिन जब किसी क्षेत्र में बिजली की खपत स्वीकृत सीमा से अधिक हो जाती है, तो स्थानीय नेटवर्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे केबल खराब होना, फ्यूज उड़ना और बिजली आपूर्ति बाधित होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं, खासकर गर्मियों के दौरान।

तकनीकी विशेषज्ञों का कहना है कि एयर कंडीशनर (एसी) के बढ़ते इस्तेमाल से बिजली की मांग में भारी वृद्धि होती है। कई घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में एसी, गीजर, माइक्रोवेव जैसे भारी विद्युत उपकरण लगाए जाते हैं, लेकिन उनकी जानकारी बिजली कंपनी को नहीं दी जाती और स्वीकृत लोड भी नहीं बढ़वाया जाता। इससे वास्तविक खपत और स्वीकृत क्षमता के बीच बड़ा अंतर पैदा हो जाता है, जिसका दबाव सीधे स्थानीय बिजली नेटवर्क पर पड़ता है।
इसके अलावा, उपभोक्ताओं के परिसरों में विद्युत भार का असंतुलित वितरण भी समस्या को और गंभीर बना देता है। गर्मियों में फ्यूज उड़ने की शिकायतों में बढ़ोतरी देखी जाती है, जिनमें से कई मामलों का कारण अलग-अलग फेज़ पर लोड का असमान वितरण होता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि अक्सर एसी जैसे भारी उपकरणों को बिना जांच-पड़ताल के किसी एक ही फेज़ से जोड़ दिया जाता है। इससे एक फेज़ पर अत्यधिक भार पड़ता है, जो ओवरहीटिंग, फ्यूज खराब होने और बिजली आपूर्ति बाधित होने का कारण बनता है। लगातार अधिक दबाव से वायरिंग और विद्युत उपकरणों की आयु भी प्रभावित हो सकती है।


उन्होंने सलाह दी कि नए एसी या अन्य भारी उपकरण लगाने से पहले लाइसेंस प्राप्त इलेक्ट्रीशियन से परामर्श अवश्य लें। साथ ही यह सुनिश्चित करें कि तीनों फेज़ पर बिजली भार संतुलित रूप से वितरित हो। आवश्यकता पड़ने पर कनेक्शन को दूसरे फेज़ में स्थानांतरित किया जाए और नए उपकरण लगाने के बाद मीटर कैबिन तथा वायरिंग की जांच भी कराई जाए।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि उपभोक्ताओं को समय-समय पर यह जांचते रहना चाहिए कि उनका स्वीकृत बिजली लोड उनकी वास्तविक खपत के अनुरूप है या नहीं। यदि जरूरत हो तो बिजली वितरण कंपनी से संपर्क कर स्वीकृत लोड बढ़वा लेना चाहिए, ताकि बिजली आपूर्ति सुचारु बनी रहे और अनावश्यक कटौती की समस्या से बचा जा सके।
With inputs from IANS
