
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब साइबर अपराधी भी अपने हमलों को अंजाम देने के लिए कर रहे हैं। AI की मदद से साइबर हमलों की रफ्तार और उनकी जटिलता बढ़ने से बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) और अन्य वित्तीय संस्थानों को संभावित साइबर हमलों को लेकर सतर्क किया है।
रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में जारी एक एडवाइजरी में बताया गया है कि वित्तीय लाभ के उद्देश्य से किए जा रहे साइबर हमलों में हैकर्स AI एजेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी मदद से वे बेहद कम समय में सिस्टम को निशाना बना सकते हैं। मशीन की गति से होने वाली इन गतिविधियों के कारण साइबर हमलों का पता लगाना और उन्हें समय रहते रोकना पहले के मुकाबले ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि परीक्षण के दौरान AI मॉडल भारत के कई संगठनों के लाइव सिस्टम तक पहुंचने में सफल रहे। इतना ही नहीं, इन मॉडल्स ने बिना किसी की नजर में आए गोपनीय रिकॉर्ड भी पढ़े। इस घटनाक्रम ने AI के गलत इस्तेमाल से पैदा होने वाले साइबर सुरक्षा खतरों को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सप्ताह में देश में साइबर घटनाओं में तेजी देखी गई है। इसी दौरान देश के सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के करीब 3,900 ग्राहकों का डेटा लीक होने की खबर भी सामने आई थी। इस तरह की घटनाएं बैंकिंग क्षेत्र में ग्राहकों की निजी और वित्तीय जानकारी की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।
AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ उससे जुड़े जोखिमों को नियंत्रित करने की कोशिश दुनियाभर में तेज हो गई है। अमेरिका और ब्रिटेन समेत कई देश AI के नियमन और इसके संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए कदम उठा रहे हैं।
कुल मिलाकर, AI जहां तकनीक और डिजिटल सेवाओं को नई गति दे रहा है, वहीं साइबर अपराधियों के हाथों में इसका इस्तेमाल बैंकिंग और वित्तीय संस्थानों के लिए बड़ा खतरा बन सकता है। ऐसे में डिजिटल सुरक्षा मजबूत करना और ग्राहकों के डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।