भारत ने विकसित किए दो स्वदेशी AI फाउंडेशन मॉडल, 22 भारतीय भाषाओं में काम करेगा EKA-1By IANS Wed, 04 November 2026 03:25 PM

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नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भारत ने एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इंडियाAI मिशन ने दो स्वदेशी फाउंडेशन मॉडल EKA-1 और Dhīr (धीर 2B और धीर 5B) जारी किए हैं। इन मॉडलों को भारतीय कंपनियों ने विकसित किया है और इनका उद्देश्य देश की भाषाई, तकनीकी तथा औद्योगिक जरूरतों के अनुरूप AI समाधान उपलब्ध कराना है।

EKA-1 को सोकेट लैब्स टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च प्राइवेट लिमिटेड ने विकसित किया है, जबकि धीर 2B और धीर 5B का निर्माण जेनटेकआईक्यू एआईटेक इनोवेशंस ने किया है। इन मॉडलों का विकास इंडियाAI मिशन के इनोवेशन सेंटर (फाउंडेशन मॉडल्स) कार्यक्रम के तहत किया गया है।

सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि स्वदेशी AI मॉडल का विकास आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भारत की तकनीकी और रणनीतिक आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है। इससे सरकार, उद्योग, शोध और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में उत्पादकता तथा कार्यक्षमता बढ़ाने के नए अवसर भी खुलेंगे।

उन्होंने कहा कि इंडियाAI मिशन के तहत विकसित संसाधनों और सुविधाओं ने EKA-1 और धीर जैसे मॉडलों के निर्माण में मदद की है। AIKosh जैसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से इन मॉडलों को शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, नवाचार करने वालों और आम लोगों तक पहुंचाया जा सकता है, जिससे देश में AI आधारित प्रयोगों और नई तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा।

इंडियाAI के मुख्य परिचालन अधिकारी (COO) सुदीप श्रीवास्तव के अनुसार, मिशन का उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अधिक सुलभ बनाना और भारतीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीक विकसित करना है। उन्होंने कहा कि EKA-1 और धीर जैसे मॉडल AI के अलग-अलग स्तरों पर भारत की प्रगति दिखाते हैं। इनमें रोजमर्रा के उपकरणों पर चलने वाले हल्के मॉडल से लेकर जटिल कारोबारी जरूरतों को पूरा करने वाले शक्तिशाली समाधान शामिल हैं।

EKA-1 की खासियत इसकी भाषाई क्षमता है। यह संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी में भी काम कर सकता है। इसे ओपन और स्पार्स हाइब्रिड लैंग्वेज मॉडल के रूप में तैयार किया गया है। इसकी क्षमताओं में गणित, कोडिंग, तार्किक विश्लेषण और AI एजेंट से जुड़े कार्य शामिल हैं।

सोकेट लैब्स के सीईओ अभिषेक उप्परवाल ने बताया कि इंडियाAI मिशन के सहयोग से उनकी कंपनी ने ऐसा उन्नत AI मॉडल तैयार किया है, जिसे भारत के बैंकिंग, वित्तीय सेवा और साइबर सुरक्षा क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।

वहीं, धीर 2B और धीर 5B को ऐसे कार्यों के लिए तैयार किया गया है, जिनमें दस्तावेजों के आधार पर जानकारी जुटाना, ज्ञान की खोज और विभिन्न प्रक्रियाओं को स्वचालित करना शामिल है। इनका इस्तेमाल रक्षा, सरकारी सेवाओं, उद्योग और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। खास बात यह है कि ये मॉडल सीमित इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले इलाकों और संवेदनशील कार्यक्षेत्रों में भी उपयोगी हो सकते हैं।

जेनटेकआईक्यू के सीईओ प्रोफेसर शशिकुमार ने बताया कि धीर के दोनों मॉडल GPU और TPU सहित अलग-अलग कंप्यूटिंग प्लेटफॉर्म पर काम कर सकते हैं। इनकी हल्की संरचना के कारण इन्हें मोबाइल फोन जैसे उपकरणों पर भी सीधे इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि AI सुविधाओं का उपयोग करने के लिए हर बार क्लाउड सर्वर या इंटरनेट कनेक्शन पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी। डिवाइस पर ही डेटा प्रोसेस होने से उपयोगकर्ताओं की जानकारी स्थानीय स्तर पर सुरक्षित रखी जा सकेगी। इससे डेटा गोपनीयता, सुरक्षा और AI तक पहुंच को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

इन मॉडलों का विकास करने वाली दोनों कंपनियों को इंडियाAI मिशन के तहत रियायती दरों पर राष्ट्रीय AI कंप्यूटिंग संसाधन और शोध संबंधी अन्य खर्चों के लिए सहायता मिली है। यह पहल दिखाती है कि सरकारी तकनीकी बुनियादी ढांचे और वित्तीय सहयोग के जरिए देश में स्वदेशी AI अनुसंधान तथा नवाचार को किस तरह गति दी जा सकती है।