नेपाल चुनाव: भारत-नेपाल सीमा 72 घंटे के लिए रहेगी बंदBy Admin Mon, 09 February 2026 11:35 AM

काठमांडू। नेपाल में 5 मार्च को होने वाले संसदीय चुनाव के दौरान सुरक्षित मतदान सुनिश्चित करने के लिए नेपाल और भारत के सुरक्षा अधिकारियों ने सीमा चौकियों को 72 घंटे तक बंद रखने पर सहमति जताई है।

मोरंग जिले के विराटनगर में शुक्रवार को नेपाल के सशस्त्र पुलिस बल (एपीएफ) और भारत के सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के बीच 16वीं डीआईजी स्तर की समन्वय बैठक में यह फैसला लिया गया। बैठक में चुनाव के दौरान अशांति फैलाने वाले तत्वों की घुसपैठ रोकने के लिए सीमा नियंत्रण कड़ा करने पर सहमति बनी।

एपीएफ के प्रवक्ता डीआईजी विष्णु प्रसाद भट्ट ने आईएएनएस को बताया, “हमने भारतीय पक्ष से चुनाव से दो दिन पहले सीमा चौकियों को बंद करने का अनुरोध किया था, जिस पर उन्होंने सहमति दे दी। समझौते के अनुसार, चुनाव दिवस सहित सीमा चौकियां तीन दिन यानी 72 घंटे तक बंद रहेंगी।”

उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान सीमा चौकियों को बंद रखना दोनों देशों में एक सामान्य प्रक्रिया है। भट्ट ने बताया, “चुनाव के समय मतदान केंद्रों पर सुरक्षा बलों की व्यापक तैनाती होती है, इसलिए सीमा पार से अवांछित तत्वों की आवाजाही रोकना जरूरी होता है।”

एपीएफ के अनुसार, बैठक में सीमा सुरक्षा, सीमा पार अपराधों पर नियंत्रण, तीसरे देशों के नागरिकों की अवैध घुसपैठ रोकने, मानव तस्करी, नकली मुद्रा, हथियार और गोला-बारूद की तस्करी तथा मादक पदार्थों की तस्करी जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

भारत पहले भी नेपाल-भारत खुली सीमा का फायदा उठाकर कश्मीरी और पाकिस्तानी आतंकियों की संभावित घुसपैठ को लेकर चिंता जता चुका है।

बैठक में सीमा स्तंभों की सुरक्षा, यात्रियों की आवाजाही सुगम बनाने, संयुक्त गश्त, आपदा बचाव अभ्यास और संयुक्त खेल गतिविधियों के आयोजन पर भी विचार-विमर्श किया गया।

दोनों पक्षों ने संवेदनशील सीमा क्षेत्रों की पहचान करने, संभावित जोखिमों का आकलन करने, शरणार्थियों और प्रवासियों की गतिविधियों पर निगरानी रखने तथा विभिन्न स्तरों पर नियमित जांच करने पर सहमति जताई।

इसके अलावा सीमा क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की बिक्री, वितरण और सेवन पर सख्ती से रोक लगाने पर भी चर्चा हुई। भट्ट ने बताया कि इस तरह की समन्वय बैठकें साल में दो बार आयोजित की जाती हैं, जो बारी-बारी से नेपाल और भारत में होती हैं।

 

With inputs from IANS