ओमान वार्ता के बाद ईरान को अमेरिका से कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद, परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम पर रोक से इनकारBy Admin Sun, 08 February 2026 11:08 AM









काहिरा – ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका के साथ जल्द ही नई दौर की वार्ता होने की उम्मीद है। उन्होंने एक दिन पहले हुई बैठक को सकारात्मक शुरुआत बताया, लेकिन यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच भरोसा बहाल करने में समय लगेगा।

अल जज़ीरा को दिए साक्षात्कार में, जिसे बाद में उनके टेलीग्राम चैनल पर फारसी भाषा में साझा किया गया, अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को नहीं छोड़ेगा। उन्होंने इसे देश का “अपरिहार्य अधिकार” बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान ऐसा समझौता करने को तैयार है, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंताएं दूर हों, लेकिन संवर्धन गतिविधियां जारी रहें।

उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपने यूरेनियम को विदेश भेजने का विरोध करता है और परमाणु विवाद का समाधान केवल बातचीत के जरिए ही संभव है। इसके अलावा उन्होंने अमेरिका की उस मांग को भी खारिज कर दिया, जिसमें ईरान से उसके मिसाइल कार्यक्रम पर अंकुश लगाने को कहा गया था। अराघची ने मिसाइल कार्यक्रम को रक्षा से जुड़ा विषय बताते हुए कहा कि इस पर कोई बातचीत नहीं हो सकती।

उन्होंने पुष्टि की कि अप्रत्यक्ष बातचीत के बावजूद ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने संक्षिप्त रूप से हाथ मिलाया था। उन्होंने अमेरिकी रिपोर्टों का खंडन करते हुए कहा कि मस्कट में बातचीत के दौरान दोनों पक्षों के बीच कोई प्रत्यक्ष वार्ता नहीं हुई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत समाप्त करने के बाद अराघची दोहा पहुंचे, जहां उन्होंने कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जासिम अल थानी से मुलाकात की।

वहीं, ईरान के सैन्य प्रमुख अब्दोलरहीम मौसवी ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी कि यदि ईरान पर युद्ध थोपा गया तो इसका असर पूरे मध्य-पूर्व में फैलेगा। उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध शुरू नहीं करेगा, लेकिन अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए निर्णायक जवाब देगा।

एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने ओमान वार्ता को “बेहद अच्छी” बताते हुए कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है। उन्होंने संकेत दिया कि दोनों पक्ष अगले सप्ताह फिर से बातचीत करेंगे।

शुक्रवार को ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की चेतावनी दी गई है जो ईरान के साथ व्यापार जारी रखते हैं। हालांकि इसमें शुल्क की दर तय नहीं की गई है, लेकिन उदाहरण के तौर पर 25 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की बात कही गई है। यह उन देशों पर लागू हो सकता है जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से ईरान से वस्तुएं या सेवाएं खरीदते हैं।

मस्कट में हुई वार्ता ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है। हाल के हफ्तों में अमेरिका ने मध्य-पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है, वहीं ईरान ने भी सैन्य तैयारियां तेज कर दी हैं, जिससे व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ गई है।

इजराइल भी इन वार्ताओं पर करीबी नजर रख रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने बताया कि वह इस सप्ताह वॉशिंगटन जाकर ट्रंप से बातचीत करेंगे। नेतन्याहू का मानना है कि किसी भी समझौते में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक और सहयोगी उग्रवादी समूहों को समर्थन समाप्त करने की शर्त शामिल होनी चाहिए।

मस्कट बैठक से पहले विटकॉफ ने इजराइल का दौरा किया था, जहां नेतन्याहू ने कहा था कि ईरान ने बार-बार यह साबित किया है कि उस पर अपने वादों को निभाने के लिए भरोसा नहीं किया जा सकता।

क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया सतर्क लेकिन सकारात्मक रही। मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात ने इस वार्ता को संवाद और तनाव कम करने की दिशा में रचनात्मक कदम बताया।

मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाट्टी ने वार्ता की मेजबानी के लिए ओमान की भूमिका की सराहना की और परमाणु मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए समर्थन जताया। वहीं यूएई के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओमान की मध्यस्थता ने बातचीत के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है और इससे क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है।

सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद ने भी वार्ता का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि इससे तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने का कूटनीतिक रास्ता खुलेगा।

कतर के विदेश मंत्री ने दोहा में अराघची से मुलाकात के दौरान उम्मीद जताई कि बातचीत से व्यापक समझौता होगा, जो पूरे क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा को मजबूत करेगा।

 

With inputs from IANS

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