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भारत की सुरक्षा एजेंसियां नेपाल के भारत से सटे इलाकों में कथित तौर पर जनसांख्यिकीय बदलाव और कट्टरपंथी गतिविधियों को लेकर सतर्क हो गई हैं। खुफिया इनपुट के आधार पर एजेंसियां नेपाल के तराई क्षेत्र में होने वाले घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि नेपाल में हाल के महीनों में सामने आए सांप्रदायिक तनाव की घटनाओं को व्यापक सुरक्षा परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है।
भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) पर नेपाल के रास्ते भारत में आतंकियों की आवाजाही को मदद देने के आरोप पहले भी लगते रहे हैं। अब एजेंसियों की चिंता कथित तौर पर ऐसी गतिविधियों को लेकर है, जिनका असर नेपाल के सामाजिक और सामुदायिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
एक खुफिया ब्यूरो अधिकारी ने दावा किया कि नेपाल में जनसांख्यिकीय बदलाव तेजी से हो रहे हैं और इससे भविष्य में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका है। अधिकारी के मुताबिक, नेपाल के कुछ हिंदू संगठनों ने धार्मिक परिवर्तन की बढ़ती घटनाओं को लेकर सरकार के सामने आपत्ति भी जताई है और इसे नियंत्रित करने की मांग की है।
भारत से सटे नेपाल के तराई क्षेत्र को लेकर सुरक्षा एजेंसियां विशेष रूप से चिंतित हैं। एक अन्य अधिकारी ने दावा किया कि पिछले एक वर्ष के दौरान इस क्षेत्र में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच कई विवाद और झड़पें सामने आई हैं। एजेंसियों को आशंका है कि यदि तनाव लगातार बढ़ा तो उसका असर खुले भारत-नेपाल सीमा के जरिए भारतीय इलाकों तक भी पहुंच सकता है।
अधिकारियों ने आरोप लगाया कि इस क्षेत्र में कथित तौर पर कट्टरपंथ से जुड़ी गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है और कुछ इलाकों में मदरसों की संख्या में अचानक वृद्धि को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियां जांच कर रही हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
नेपालगंज को लेकर अधिकारियों ने दावा किया कि वहां दावत-ए-इस्लामी (DeI) से जुड़े लोगों के ठहरने के लिए एक गेस्ट हाउस बनाया गया है। यह संगठन पाकिस्तान में शुरू हुआ था और एक इस्लामी मिशनरी संगठन के रूप में काम करता है। अधिकारियों ने संगठन पर हिंदू धर्म के प्रति आलोचनात्मक रुख अपनाने और लोगों को धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने जैसे आरोप लगाए हैं। इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
भारतीय अधिकारियों के अनुसार, ऐसी गतिविधियों से नेपाल में कुछ नए इस्लामी संगठनों के उभरने और कथित तौर पर कट्टरपंथ बढ़ने की आशंका है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि यदि सामाजिक तनाव लगातार बढ़ता रहा तो इसका असर भारत की सुरक्षा पर भी पड़ सकता है।
नेपाल के साथ भारत की खुली सीमा इस चिंता को और गंभीर बनाती है। नेपालगंज और तराई के आसपास के इलाके उत्तर प्रदेश की सीमा के बेहद करीब हैं। उत्तर प्रदेश का बहराइच जिला भी संवेदनशील इलाकों में शामिल रहा है। वर्ष 2024 में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान बहराइच में हिंसा, आगजनी और तनाव की घटनाएं सामने आई थीं। मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत कार्रवाई भी की गई थी।
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि भारत के लिए चुनौती केवल नेपाल में कथित जनसांख्यिकीय बदलाव या सांप्रदायिक तनाव तक सीमित नहीं है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि किसी भी लंबे समय तक चलने वाली अस्थिरता का फायदा उठाकर भारत-नेपाल की खुली सीमा के जरिए अवैध गतिविधियों या आतंकियों की आवाजाही को बढ़ावा दिया जा सकता है।
एजेंसियों को आशंका है कि यदि नेपाल के सीमावर्ती इलाकों में तनाव और अस्थिरता बढ़ती है तो पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI कथित तौर पर इसका फायदा उठाने की कोशिश कर सकती है। अधिकारियों के मुताबिक, ऐसी स्थिति में सीमा के जरिए भारत में घुसने वाले आतंकियों को जम्मू-कश्मीर समेत देश के अन्य हिस्सों में भेजे जाने का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि, नेपाल में कथित जनसांख्यिकीय बदलाव, ISI की भूमिका और विभिन्न संगठनों की गतिविधियों को लेकर सामने आए इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। फिलहाल भारतीय एजेंसियां सीमा से लगे नेपाली इलाकों में घटनाक्रम पर नजर रखते हुए संभावित सुरक्षा प्रभावों का आकलन कर रही हैं।
With inputs from IANS