
पाकिस्तान के अशांत बलूचिस्तान प्रांत में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और सेना समर्थित सशस्त्र समूहों को निशाना बनाकर कई हमले किए जाने की खबर है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, बसीमा, पंजगुर और तुरबत के अलग-अलग इलाकों में हुए हमलों के दौरान गोलीबारी और सशस्त्र झड़पें हुईं। हालांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने इन घटनाओं में हताहतों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की है।
द बलूचिस्तान पोस्ट ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि बुधवार को बसीमा के साजिद इलाके के पास सुरक्षा बलों के एक काफिले पर घात लगाकर हमला किया गया। रिपोर्ट के अनुसार, हमले में सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचा और उनके दो वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। इलाके में दो घंटे से अधिक समय तक झड़पें जारी रहने की बात भी कही गई है। बाद में सुरक्षा बलों की मदद के लिए हेलीकॉप्टर पहुंचे।
इसी दिन पंजगुर के ग्वार्गो इलाके में भी पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के तीन वाहनों वाले काफिले को निशाना बनाए जाने की खबर है। हालांकि, इस हमले में हताहतों या वाहनों को हुए नुकसान के बारे में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
तुरबत के नोडुज इलाके में गुरुवार सुबह पाकिस्तानी सेना समर्थित कथित 'डेथ स्क्वॉड' के सदस्यों पर भी हमला किए जाने की सूचना है। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, इलाके में काफी देर तक गोलीबारी की आवाजें सुनाई देती रहीं। इस घटना में भी हताहतों की संख्या की पुष्टि नहीं हुई है।
## ग्वादर में सैन्य ठिकानों पर हमलों को लेकर BLF का दावा
इन घटनाओं से पहले, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (BLF) ने इस सप्ताह दावा किया था कि उसने ग्वादर जिले में फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गनाइजेशन (FWO) के शिविर और अन्य सैन्य एवं पुलिस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाकर किए गए हमलों में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के 80 से अधिक कर्मियों को मार गिराया।
संगठन के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच ने एक बयान में कहा कि 'ऑपरेशन अलमास' के दौरान मारे गए लोगों में मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) के एक कैप्टन, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) के अधिकारी और स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) के कर्मी शामिल थे। उन्होंने कई अन्य लोगों के गंभीर रूप से घायल होने का भी दावा किया।
द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, BLF प्रवक्ता ने बताया कि अभियान 22 अक्टूबर को FWO शिविर के मुख्य प्रवेश द्वार पर वाहन से किए गए आत्मघाती हमले के साथ शुरू हुआ। उनके अनुसार, विस्फोट में मुख्य द्वार और आसपास की चौकियों को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद संगठन के अन्य लड़ाकों ने परिसर में प्रवेश किया।
प्रवक्ता ने दावा किया कि परिसर में दाखिल होने के बाद लड़ाकों ने ISI के एक कार्यालय पर हमला किया, जिसमें एक अधिकारी समेत छह कर्मियों की मौत हुई। एक अन्य कार्यालय में हुई झड़प के दौरान MI के एक कैप्टन सहित छह कर्मियों के मारे जाने का भी दावा किया गया।
बयान के अनुसार, इसके बाद लड़ाकों ने बहुमंजिला आवासीय बैरक को निशाना बनाया और इमारत के भीतर अपनी स्थिति मजबूत कर ली। ग्वाहराम बलोच ने दावा किया कि इन बैरकों में हुई लड़ाई में कुल 21 सुरक्षाकर्मी मारे गए।
उन्होंने कहा कि परिसर पर दोबारा नियंत्रण हासिल करने की कोशिश में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों को रातभर नौ और झड़पों का सामना करना पड़ा। इसके बाद मोर्टार और तोपों से गोलाबारी की गई।
BLF प्रवक्ता के मुताबिक, अगली सुबह अतिरिक्त सैनिकों और बख्तरबंद वाहनों के साथ शुरू किया गया नया सैन्य अभियान भी विफल कर दिया गया। उन्होंने इस दौरान करीब 13 और सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने तथा दो बख्तरबंद वाहनों के नष्ट होने का दावा किया।
संगठन ने यह भी कहा कि अभियान के दौरान उसके लड़ाकों ने चार क्वाडकॉप्टर और दो निगरानी ड्रोन मार गिराए। इसके अलावा, BLF की स्नाइपर टीम द्वारा छह पाकिस्तानी सैन्यकर्मियों को मारने का दावा भी किया गया।
इन सभी आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पाकिस्तानी अधिकारियों की ओर से भी रिपोर्ट में बताए गए नुकसान के दावों की पुष्टि करने वाला कोई आधिकारिक विवरण नहीं दिया गया है।
## CPEC और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़ी परियोजनाओं को निशाना बनाने की चेतावनी
BLF प्रवक्ता ने FWO और अन्य विकास संस्थानों पर आरोप लगाया कि उनका इस्तेमाल बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण बनाए रखने और विदेशी कंपनियों के हितों की रक्षा के लिए किया जाता है। संगठन ने पाकिस्तान पर क्षेत्र के संसाधनों के दोहन और स्थानीय आबादी के हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया।
ग्वाहराम बलोच ने कहा कि संगठन किसी बाहरी शक्ति या देश के खिलाफ नहीं है, बल्कि बलूचिस्तान पर पाकिस्तान के नियंत्रण और क्षेत्र के समुद्री तट तथा प्राकृतिक संसाधनों के कथित शोषण का विरोध करता है।
उन्होंने चेतावनी दी कि BLF चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC), रेको डिक, सैंडक और बलूचिस्तान में चल रही अन्य परियोजनाओं को निशाना बनाना जारी रखेगा। प्रवक्ता ने कहा कि बलूच लोगों की सहमति के बिना पाकिस्तान में शुरू की जाने वाली परियोजनाओं पर हमले हो सकते हैं और विदेशी संस्थानों को इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
बलूचिस्तान में हालिया घटनाएं ऐसे समय सामने आई हैं, जब क्षेत्र में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों, बलूच सशस्त्र संगठनों और विकास परियोजनाओं को लेकर तनाव बना हुआ है। ताजा हमलों में नुकसान की वास्तविक सीमा और ग्वादर अभियान में हताहतों की संख्या का स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है।