वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की जीडीपी वृद्धि दर FY27 में 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान : एसबीआई रिसर्चBy Admin Mon, 11 May 2026 11:48 AM

नई दिल्ली : वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बाहरी झटकों के बावजूद India की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है। State Bank of India की रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

SBI Research की रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले वित्त वर्ष FY26 की चौथी तिमाही में वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर करीब 7.2 प्रतिशत रहने की संभावना है, जबकि पूरे वित्त वर्ष FY26 की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक दबावों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूत विकास गति बनाए रखी है। हाई-फ्रीक्वेंसी आर्थिक आंकड़े संकेत देते हैं कि आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, हालांकि चौथी तिमाही में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

Soumya Kanti Ghosh, जो SBI के ग्रुप चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर हैं, ने कहा कि ग्रामीण खपत मजबूत बनी हुई है और इसे कृषि तथा गैर-कृषि गतिविधियों से सकारात्मक समर्थन मिल रहा है।

उन्होंने कहा कि सरकारी प्रोत्साहन उपायों की वजह से शहरी खपत में भी पिछले त्योहारों के सीजन के बाद लगातार सुधार देखा गया है।

रिपोर्ट में बताया गया कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के कर्ज वितरण में FY26 के दौरान तेजी आई। बैंक क्रेडिट ग्रोथ FY25 के 11 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 16.1 प्रतिशत हो गई। FY26 में कुल अतिरिक्त कर्ज वृद्धि 29.5 लाख करोड़ रुपये रही।

इसमें पहली छमाही में कर्ज वृद्धि केवल 5 लाख करोड़ रुपये थी, जबकि दूसरी छमाही में यह बढ़कर 24.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई।

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार द्वारा जीएसटी और अन्य उपायों के जरिए खपत को बढ़ावा देने से दूसरी छमाही में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत बनी रही। यही रुझान अब भी जारी है और 30 अप्रैल 2026 तक क्रेडिट ग्रोथ करीब 16 प्रतिशत दर्ज की गई।

हालांकि रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि FY27 की दूसरी छमाही में ऊंचे बेस इफेक्ट के कारण कर्ज वृद्धि की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है। पूरे वित्त वर्ष के लिए क्रेडिट ग्रोथ 13 से 14 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पश्चिम एशिया संकट जैसी बाहरी चुनौतियों के बावजूद घरेलू खपत भारत की जीडीपी वृद्धि को सहारा देती रहेगी।

एसबीआई रिसर्च के मॉडल के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की वृद्धि से चालू खाता घाटा (CAD) 35 बेसिस प्वाइंट तक बढ़ सकता है। साथ ही महंगाई में 35-40 बेसिस प्वाइंट और जीडीपी वृद्धि पर 20-25 बेसिस प्वाइंट का असर पड़ सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मई में कच्चे तेल की कीमत लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल रहने के कारण पूरे साल का औसत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है। इसके बावजूद FY27 में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।

 

With inputs from IANS