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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई अभी खत्म नहीं हुई है। उन्होंने तेहरान के साथ तत्काल बातचीत की संभावना से भी इनकार किया और दावा किया कि हालिया टकराव के बाद ईरान की सैन्य और आर्थिक क्षमता पर काफी असर पड़ा है।
ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि ईरान गंभीर आर्थिक और सैन्य दबाव में है। उन्होंने दावा किया कि ईरान अपने सैनिकों को भुगतान करने की स्थिति में नहीं है और वह “गंभीर मुश्किल” में है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के दोबारा खुलने को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इसका मतलब यह नहीं है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई खत्म हो गई है। उन्होंने कहा, “इसका मतलब यह नहीं है कि हमारा सैन्य अभियान खत्म हो गया है।”
हालांकि, ट्रंप ने यह नहीं बताया कि अमेरिका आगे किस तरह की सैन्य कार्रवाई कर सकता है या ऐसी कार्रवाई के लिए किन परिस्थितियों को आधार बनाया जाएगा।
ईरान के साथ बातचीत की संभावना पर भी ट्रंप ने कहा कि फिलहाल तेहरान से मिलने या बातचीत करने की कोई योजना नहीं है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि रणनीतिक जलमार्ग के खुलने के बावजूद अमेरिका तत्काल कूटनीतिक वार्ता के बजाय दबाव की नीति जारी रखना चाहता है।
ट्रंप ने रूस को लेकर भी संकेत दिया कि फिलहाल वह मॉस्को के रुख से संतुष्ट हैं। जब उनसे पूछा गया कि ईरान के साथ रूस के संबंध कम नहीं होने पर क्या अमेरिका उसके खिलाफ कदम उठाएगा, तो उन्होंने कहा कि यह स्थिति पर निर्भर करेगा। साथ ही उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के मामले में रूस के व्यवहार को अब तक “काफी अच्छा” बताया।
ट्रंप की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है और फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी तथा अरब सागर से जोड़ता है।
यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख तेल और LNG उत्पादक देशों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक ऊर्जा आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने को अहम घटनाक्रम बताया, लेकिन इसे क्षेत्रीय संकट की समाप्ति के रूप में पेश करने से परहेज किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि अमेरिका ईरान के साथ बातचीत के लिए किन शर्तों पर तैयार होगा।
