
रांची: हथियार के साथ गिरफ्तार किए गए कुख्यात सुजीत सिन्हा गिरोह और 'शांति सेना' से जुड़े तीन आरोपियों को राहत नहीं मिली है. CID की विशेष कोर्ट ने मोहम्मद सिराज, मोहम्मद शाहिद और इनामुल खान की जमानत याचिका खारिज कर दी है. कोर्ट ने मामले की गंभीरता और बरामद हथियारों को देखते हुए आरोपियों को राहत देने से इनकार किया. तीनों आरोपियों ने कोर्ट से डिफॉल्ट बेल की गुहार लगाई थी. कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि 17 जनवरी 2026 को ही कोर्ट ने जांच की अवधि को कानूनी प्रक्रिया के तहत 180 दिनों के लिए बढ़ा दिया था. कोर्ट ने यह भी नोट किया कि उस विस्तार आदेश को किसी भी उच्च न्यायालय में चुनौती नहीं दी गई है.
सीआईडी को सौंप दी गई थी जांच
मामला 22 अक्टूबर 2025 का है, जब मेसरा थाना पुलिस ने चुट्टू ओवरब्रिज के पास से एक टाटा सफारी गाड़ी को पकड़ा गया था. तलाशी के दौरान गाड़ी से तीन अवैध पिस्तौल, 13 जिंदा कारतूस और मैगजीन बरामद किए गए थे. पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया था कि वे सुजीत सिन्हा गिरोह के सदस्य हैं और व्यवसायियों से रंगदारी वसूलने का काम करते हैं. बाद में इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच CID को सौंप दी गई थी. बचाव पक्ष की ओर डिफ़ॉल्ट बेल की मांग करते हुए कोर्ट को बताया कि 90 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं की गई और जांच की अवधि बढ़ाने से पहले उन्हें उचित नोटिस नहीं दिया गया है.
जांच की अवधि को पहले ही 90 से बढ़ाकर 180 दिन कर दिया गया
CID की ओर से अपर लोक अभियोजक मो. खुशबुद्दीन अली ने पक्ष रखा, जिन्होंने तीनों आरोपियों की जमानत का पुरजोर विरोध किया. कोर्ट में तर्क दिया कि यूएपीए की धारा 43D(2)(b) के तहत कोर्ट ने जांच की अवधि को पहले ही 90 से बढ़ाकर 180 दिन कर दिया है. इसलिए डिफ़ॉल्ट बेल का आधार नहीं बनता है.